चीनी और कैंसर का आपसी रिश्ता 🍬🧬
"क्या चीनी कैंसर को बढ़ावा देती है?" यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है, और इसका जवाब आसान नहीं है। हालांकि चीनी (ग्लूकोज) शरीर की ऊर्जा का मुख्य स्रोत है, लेकिन अधिक मात्रा में चीनी का सेवन कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है।
कैंसर कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ती हैं और इन्हें भी ऊर्जा के लिए ग्लूकोज की जरूरत होती है।
हालाँकि चीनी सीधा कैंसर का कारण नहीं बनती, लेकिन अत्यधिक चीनी सेवन से मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, और सूजन जैसी स्थितियाँ बनती हैं — जो कई प्रकार के कैंसर (जैसे ब्रेस्ट, कोलोरेक्टल, लिवर) से जुड़ी हैं।
मोटापा – चीनी से वजन तेजी से बढ़ता है, जो कैंसर के कई रूपों का जोखिम बढ़ाता है।
इंसुलिन स्तर में वृद्धि – हाई इंसुलिन स्तर कुछ कैंसर की वृद्धि को प्रेरित करता है।
क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन (लगातार सूजन) – अत्यधिक शक्कर सूजन को बढ़ा सकती है, जिससे कोशिकाएँ कैंसर में बदल सकती हैं।
चीनी की सीमित मात्रा लें – WHO के अनुसार, कुल दैनिक कैलोरी का 10% से कम चीनी से होना चाहिए।
नेचुरल शुगर का सेवन बढ़ाएँ – फलों और सूखे मेवों में मौजूद प्राकृतिक शर्करा शरीर के लिए बेहतर है।
सोडा, मिठाई, बेकरी आइटम्स से दूरी बनाएँ – इनमें हिडन शुगर अधिक मात्रा में होती है।
लेबल पढ़ें – "Fructose," "Corn Syrup," "Sucrose" जैसे शब्दों से सावधान रहें।
चीनी सीधे तौर पर कैंसर का कारण नहीं है, लेकिन इसका अधिक सेवन अप्रत्यक्ष रूप से कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली के लिए चीनी का सीमित और संतुलित सेवन ज़रूरी है। “मीठा ज़रूरी है, लेकिन समझदारी से!”