ब्लॉग शीर्षक: MRI बनाम CT स्कैन – किसे कब करवाएं? 🧠🩻🔍
जब डॉक्टर किसी गंभीर बीमारी का सही कारण और स्थान जानना चाहते हैं, तो वे MRI या CT स्कैन की सलाह देते हैं। दोनों ही स्कैनिंग तकनीकें शरीर के अंदर की सटीक तस्वीर देती हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका, उपयोग और फायदे अलग-अलग हैं।
आइए समझते हैं – आपको किस स्थिति में कौन-सा स्कैन करवाना चाहिए।
इसमें शक्तिशाली मैग्नेट और रेडियो वेव का उपयोग होता है।
यह शरीर के सॉफ्ट टिश्यू (मांसपेशियां, नसें, ब्रेन, लिगामेंट) की बहुत डिटेल्ड तस्वीर देता है।
✔ दिमाग, रीढ़ की हड्डी, नसों की बीमारी
✔ लिगामेंट, मसल्स और जोड़ की चोट
✔ ट्यूमर का सही आकार और फैलाव पता करने के लिए
✔ ब्रेन स्ट्रोक या मल्टीपल स्क्लेरोसिस
बिना रेडिएशन
सॉफ्ट टिश्यू की बेहतरीन तस्वीर
कई तरह के रोगों का शुरुआती पता
महंगा और समय ज्यादा लगता है
मेटल इम्प्लांट (पेसमेकर, स्क्रू) वालों के लिए सुरक्षित नहीं
लंबे समय तक बंद मशीन में लेटना पड़ता है
इसमें एक्स-रे बीम का उपयोग होता है।
यह हड्डियों, लंग्स और चोट वाले हिस्सों की तेज और साफ तस्वीर देता है।
✔ हड्डी टूटना या फ्रैक्चर
✔ फेफड़ों का कैंसर, इन्फेक्शन या ब्लीडिंग
✔ एक्सीडेंट में इंटरनल इंजरी चेक करना
✔ लीवर, किडनी या पेट के अंगों की स्कैनिंग
तेज और किफायती
हड्डी और लंग्स की बेहतरीन तस्वीर
इमरजेंसी केस में तुरंत रिज़ल्ट
रेडिएशन डोज ज्यादा
सॉफ्ट टिश्यू की डिटेल MRI जितनी नहीं
MRI: सॉफ्ट टिश्यू, ब्रेन, नसें, ट्यूमर के लिए बेहतर
CT स्कैन: हड्डी, लंग्स, एक्सीडेंट और ब्लीडिंग के लिए तेज
💬 निष्कर्ष:
MRI और CT स्कैन दोनों की अपनी-अपनी खासियत है। डॉक्टर आपके लक्षण, बीमारी और स्थिति के आधार पर तय करते हैं कि कौन-सा स्कैन सही रहेगा।
⚠️ कभी भी खुद से स्कैन न करवाएं, डॉक्टर की सलाह लें।