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स्क्रीनिंग और डिटेक्शन में अंतर


स्क्रीनिंग और डिटेक्शन में अंतर 🩺🔍



कैंसर और अन्य बीमारियों के मामले में स्क्रीनिंग और डिटेक्शन (पता लगाना) – ये दोनों शब्द सुनने में मिलते-जुलते हैं, लेकिन इनके अर्थ और उद्देश्य अलग होते हैं।





🧪 1. स्क्रीनिंग (Screening)



🔹 मतलब: जब किसी व्यक्ति को कोई लक्षण नहीं हैं, फिर भी बीमारी को शुरुआती अवस्था में खोजने के लिए जांच की जाती है, तो उसे स्क्रीनिंग कहते हैं।

🔹 उद्देश्य: बीमारी को शुरुआती या प्री-कैंसर स्टेज में पकड़ना, ताकि इलाज आसान हो।

🔹 उदाहरण:





💡 स्क्रीनिंग आमतौर पर उम्र, लिंग, या फैमिली हिस्ट्री के आधार पर की जाती है।





🔍 2. डिटेक्शन (Detection)



🔹 मतलब: जब किसी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण मौजूद हों और जांच के जरिए यह पता लगाया जाए कि बीमारी है या नहीं, तो उसे डिटेक्शन कहते हैं।

🔹 उद्देश्य: लक्षणों की वजह पहचानना और सही निदान करना।

🔹 उदाहरण:





💡 डिटेक्शन तब होता है जब बीमारी का शक पहले से हो।





📊 मुख्य अंतर एक नजर में







निष्कर्ष:

स्क्रीनिंग बीमारी को आने से पहले पकड़ने में मदद करती है, जबकि डिटेक्शन बीमारी के मौजूद होने की पुष्टि करता है।

दोनों ही समय पर इलाज और बेहतर परिणाम के लिए जरूरी हैं।


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