कैंसर ग्रेडिंग और स्टेजिंग: पूरा मार्गदर्शन 🎯
कैंसर के इलाज की योजना बनाने के लिए डॉक्टर दो अहम चीज़ों पर ध्यान देते हैं — ग्रेडिंग और स्टेजिंग। ये दोनों ही कैंसर की गंभीरता और फैलाव को समझने में मदद करते हैं, लेकिन इनका मतलब अलग है।
🔹 मतलब:
ग्रेडिंग बताती है कि कैंसर कोशिकाएं माइक्रोस्कोप के नीचे कितनी असामान्य दिख रही हैं और वे कितनी तेजी से बढ़ सकती हैं।
🔹 कैसे किया जाता है:
बायोप्सी के बाद टिश्यू को लैब में जांचा जाता है।
कोशिकाओं के आकार, आकारिकी (morphology), और विभाजन दर के आधार पर ग्रेड तय होता है।
🔹 ग्रेड के प्रकार:
ग्रेड 1: कोशिकाएं लगभग सामान्य जैसी, धीरे-धीरे बढ़ने वाली।
ग्रेड 2: थोड़ी असामान्य, मध्यम गति से बढ़ने वाली।
ग्रेड 3: बहुत असामान्य, तेजी से बढ़ने और फैलने वाली।
💡 उच्च ग्रेड का मतलब ज़्यादा आक्रामक कैंसर होता है।
🔹 मतलब:
स्टेजिंग बताती है कि कैंसर शरीर में कितना और कहां तक फैल चुका है।
🔹 कैसे किया जाता है:
इमेजिंग टेस्ट (MRI, CT, PET स्कैन)
बायोप्सी
सर्जरी के दौरान जाँच
🔹 TNM सिस्टम:
T (Tumor): ट्यूमर का आकार
N (Nodes): कितने लिम्फ नोड्स प्रभावित हैं
M (Metastasis): क्या कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैला है
🔹 स्टेज के प्रकार:
स्टेज 0: सिर्फ सतह पर, बहुत शुरुआती अवस्था
स्टेज 1: छोटा, स्थानीयकृत ट्यूमर
स्टेज 2: बड़ा ट्यूमर, पास के ऊतकों में फैलाव
स्टेज 3: लिम्फ नोड्स में फैलाव
स्टेज 4: शरीर के अन्य हिस्सों (जैसे फेफड़े, लीवर, हड्डियां) में फैलाव
ग्रेडिंग: कोशिकाओं की असामान्यता और वृद्धि दर
स्टेजिंग: कैंसर का आकार और फैलाव
ग्रेडिंग से डॉक्टर को पता चलता है कि कैंसर कितनी तेजी से बढ़ सकता है, जबकि स्टेजिंग बताती है कि वह कितना फैल चुका है।
इलाज का सही चुनाव (सर्जरी, कीमो, रेडिएशन, इम्यूनोथेरेपी) इन दोनों के संयुक्त आकलन पर आधारित होता है।