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पॅट स्कैन: क्या होता है और कब जरूरी?


पॅट स्कैन (PET Scan): क्या होता है और कब ज़रूरी?



कैंसर की जांच और उसके इलाज की योजना बनाने में पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (PET) स्कैन एक बेहद अहम तकनीक है। इसे आमतौर पर PET-CT स्कैन भी कहा जाता है क्योंकि इसमें PET और CT दोनों की जानकारी को जोड़ा जाता है।





🔎 पॅट स्कैन क्या होता है?



PET स्कैन में शरीर की कोशिकाओं की गतिविधि (activity) और चयापचय (metabolism) को देखा जाता है।







🩺 PET स्कैन कब ज़रूरी होता है?



PET स्कैन हर मरीज को नहीं किया जाता। डॉक्टर इसे खास परिस्थितियों में सुझाते हैं, जैसे:





  1. कैंसर का पता लगाने के लिए





    • शरीर में कहीं छुपा हुआ कैंसर तो नहीं है, यह देखने में मदद करता है।






  2. स्टेजिंग (Staging) जानने के लिए





    • कैंसर किस स्टेज पर है और कितना फैला है, यह पता चलता है।






  3. इलाज की योजना बनाने में





    • ऑपरेशन, रेडिएशन या कीमोथेरेपी से पहले डॉक्टर को सही जानकारी मिलती है।






  4. इलाज का असर देखने के लिए





    • इलाज के दौरान या बाद में यह जांच करता है कि ट्यूमर छोटा हो रहा है या नहीं।






  5. कैंसर वापस तो नहीं आया?





    • फॉलो-अप में यह पता लगाने के लिए कि कहीं कैंसर दोबारा तो विकसित नहीं हो रहा।









✅ PET स्कैन के फायदे







⚠️ किन बातों का ध्यान रखें?







👉 निष्कर्ष

PET स्कैन कैंसर के निदान, स्टेजिंग और इलाज की योजना बनाने में बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, हर मरीज को इसकी आवश्यकता नहीं होती, इसलिए इसे केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करवाना चाहिए।


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