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गिलोय और कैंसर: तथ्य बनाम भ्रम


गिलोय और कैंसर: तथ्य बनाम भ्रम



भारत में गिलोय (Tinospora cordifolia) को प्राचीन समय से आयुर्वेद में अमृत बेल कहा जाता है। इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, बुखार और शुगर जैसी बीमारियों में लाभकारी माना जाता है। हालाँकि, जब बात कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की आती है, तो अक्सर गिलोय को लेकर भ्रम फैलाया जाता है। आइए समझते हैं गिलोय और कैंसर से जुड़े तथ्य और भ्रांतियाँ—





गिलोय और कैंसर से जुड़े आम भ्रम





  1. भ्रम: गिलोय कैंसर को पूरी तरह ठीक कर देती है।

    तथ्य: ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है कि गिलोय कैंसर का इलाज कर सकती है। कैंसर का उपचार कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, सर्जरी और इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक पद्धतियों से ही संभव है।




  2. भ्रम: रोज़ गिलोय का सेवन करने से कैंसर कभी नहीं होता।

    तथ्य: कैंसर एक जटिल बीमारी है जो जेनेटिक, लाइफस्टाइल और पर्यावरणीय कारणों से होती है। केवल गिलोय का सेवन इसे रोकने की गारंटी नहीं देता।




  3. भ्रम: गिलोय लेने से कीमोथेरेपी की ज़रूरत नहीं पड़ती।

    तथ्य: कीमोथेरेपी या अन्य आधुनिक उपचार कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने के लिए ज़रूरी हैं। गिलोय केवल इम्यूनिटी और ऊर्जा स्तर को सपोर्ट कर सकती है, लेकिन इलाज का विकल्प नहीं है।







गिलोय से संभावित लाभ







कब सावधानी बरतें?







निष्कर्ष:

गिलोय एक उपयोगी औषधीय पौधा है, लेकिन कैंसर का इलाज नहीं। इसे केवल सपोर्टिव थेरेपी के रूप में या रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सीमित मात्रा में ही लिया जाना चाहिए, वह भी डॉक्टर की सलाह के बाद। कैंसर रोगियों को हमेशा वैज्ञानिक और प्रमाणित उपचार ही अपनाना चाहिए।


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