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हर्बल दवाओं के साथ कीमो थेरेपी लेना?


हर्बल दवाओं के साथ कीमोथेरेपी लेना: क्या यह सुरक्षित है?



कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी (Chemotherapy) एक महत्वपूर्ण उपचार है। कई मरीज इलाज के दौरान अपनी प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाने या साइड इफेक्ट्स कम करने के लिए हर्बल दवाओं (आयुर्वेदिक/जड़ी-बूटियों) का सेवन करना चाहते हैं। लेकिन क्या यह सही है? आइए समझते हैं –





🔍 हर्बल दवाओं और कीमोथेरेपी के बीच संबंध





  1. दवा-दवा का इंटरैक्शन (Drug Interaction):





    • कीमोथेरेपी दवाएं शरीर में खास तरह से टूटकर असर करती हैं।




    • कुछ हर्बल दवाएं (जैसे गिलोय, हल्दी, अश्वगंधा) शरीर में इन्हें तोड़ने वाले एंजाइम को प्रभावित कर सकती हैं।




    • इससे कीमोथेरेपी का असर कम या ज्यादा हो सकता है।






  2. रक्त पतला करने वाली जड़ी-बूटियां:





    • लहसुन, अदरक, ग्रीन टी आदि का अधिक सेवन ब्लीडिंग का रिस्क बढ़ा सकता है, खासकर अगर मरीज कीमो के साथ खून पतला करने वाली दवाएं भी ले रहा हो।






  3. लिवर और किडनी पर असर:





    • कई हर्बल दवाएं लिवर और किडनी पर असर डाल सकती हैं, जबकि यही अंग कीमो दवाओं को बाहर निकालने का काम करते हैं।




    • इससे शरीर में कीमो दवा का लेवल खतरनाक रूप से बढ़ सकता है।









✅ क्या करें?







❌ क्या न करें?







📌 निष्कर्ष



हर्बल दवाओं और कीमोथेरेपी को एक साथ लेना हमेशा सुरक्षित नहीं होता। यह दवा-दवा इंटरैक्शन, साइड इफेक्ट्स बढ़ने या इलाज की प्रभावशीलता कम होने का कारण बन सकता है। इसलिए हर मरीज को अपने डॉक्टर/ऑन्कोलॉजिस्ट से सलाह लेकर ही किसी भी हर्बल या आयुर्वेदिक दवा का उपयोग करना चाहिए।


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