🌿 बुजुर्गों में कैंसर इलाज की सावधानियाँ
बुजुर्ग (Senior Citizens) में कैंसर का इलाज थोड़ा जटिल हो सकता है क्योंकि उनकी उम्र के साथ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और अन्य बीमारियाँ (जैसे डायबिटीज, हाई BP, हृदय रोग, किडनी/लिवर की समस्या) भी मौजूद हो सकती हैं।
इसलिए इलाज के समय कुछ विशेष सावधानियाँ बरतना ज़रूरी है:
बुजुर्गों में कम डोज़ वाली कीमोथेरपी/रेडिएशन या टारगेटेड थेरेपी ज़्यादा सुरक्षित रहती है।
डॉक्टर मरीज की समग्र स्वास्थ्य स्थिति देखकर ही इलाज तय करते हैं।
बुजुर्ग अक्सर पहले से कई दवाइयाँ लेते हैं (ब्लड प्रेशर, शुगर, हृदय आदि के लिए)।
नई दवाइयाँ जोड़ते समय ड्रग इंटरैक्शन की जाँच बहुत ज़रूरी है।
बुजुर्गों में कमज़ोरी और वज़न घटना आम समस्या है।
हल्का, सुपाच्य, प्रोटीन युक्त भोजन (दूध, दालें, सूप, खिचड़ी) देना चाहिए।
पानी और तरल पदार्थों की पर्याप्त मात्रा लेना बहुत ज़रूरी है।
कीमो/रेडिएशन से होने वाली थकान, मितली, बाल झड़ना, इन्फेक्शन का खतरा बुजुर्गों में ज्यादा असर डाल सकता है।
इनके लिए पहले से प्रिवेंटिव दवाइयाँ और साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए।
बुजुर्गों में इलाज के दौरान डर, तनाव, अकेलापन बढ़ सकता है।
परिवार और काउंसलिंग का सहयोग बहुत ज़रूरी है।
इलाज के दौरान ब्लड टेस्ट, हार्ट/किडनी फंक्शन टेस्ट समय-समय पर करवाना चाहिए।
डॉक्टर की सलाह से ही किसी भी थेरेपी (आयुर्वेद, होम्योपैथी, नेचुरोपैथी) को सहायक रूप में इस्तेमाल करना चाहिए।
✅ निष्कर्ष:
बुजुर्गों में कैंसर का इलाज धीरे-धीरे और सावधानी से करना चाहिए। परिवार का सहयोग, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और डॉक्टर की लगातार निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है।