🤰 कैंसर और गर्भावस्था: क्या होता है असर?
गर्भावस्था के दौरान कैंसर होना एक दुर्लभ लेकिन जटिल स्थिति है। इस समय मां और शिशु दोनों की सेहत को ध्यान में रखकर इलाज तय किया जाता है।
👩⚕️ मां पर असर: कैंसर गर्भावस्था के दौरान सामान्य से तेज़ बढ़ सकता है क्योंकि शरीर में हार्मोनल और इम्यून बदलाव होते हैं।
👶 बच्चे पर असर: कैंसर सीधे बच्चे को प्रभावित नहीं करता, लेकिन इलाज (जैसे कीमो, रेडिएशन, दवाइयाँ) गर्भस्थ शिशु पर असर डाल सकते हैं।
⏳ डायग्नोसिस में देरी: कई बार गर्भावस्था के लक्षण (थकान, उल्टी, ब्लीडिंग) कैंसर से मिलते-जुलते होते हैं, जिससे पहचान देर से होती है।
🚫 रेडिएशन थेरेपी: आमतौर पर गर्भावस्था में टाली जाती है, क्योंकि यह बच्चे को नुकसान पहुँचा सकती है।
💉 कीमोथेरेपी: गर्भावस्था के शुरुआती 3 महीने (पहली तिमाही) में नहीं दी जाती, लेकिन दूसरी और तीसरी तिमाही में कुछ दवाइयाँ सुरक्षित हो सकती हैं।
🔪 सर्जरी: अगर ज़रूरी हो, तो कई बार गर्भावस्था में भी सुरक्षित तरीके से की जा सकती है।
🩺 टीम वर्क: गाइनी डॉक्टर + ऑन्कोलॉजिस्ट मिलकर इलाज का सही तरीका तय करते हैं।
हर केस अलग होता है, इसलिए इलाज व्यक्ति-विशेष पर निर्भर करता है।
जल्द पहचान और डॉक्टर की सलाह से मां और बच्चे दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
स्वयं से कोई दवा या नुस्खा अपनाना खतरनाक हो सकता है।
👉 निष्कर्ष: गर्भावस्था में कैंसर एक चुनौती है, लेकिन सही मेडिकल टीम और संतुलित इलाज से मां और शिशु दोनों की सेहत सुरक्षित रखी जा सकती है।