कैंसर आज के समय की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। अक्सर लोग सोचते हैं कि कैंसर सिर्फ़ बुजुर्गों की बीमारी है, लेकिन सच यह है कि यह किसी भी उम्र में हो सकता है। ऐसे में कैंसर स्क्रीनिंग (Cancer Screening) बेहद ज़रूरी है।
कैंसर स्क्रीनिंग एक जाँच प्रक्रिया है, जिसमें बिना लक्षण दिखे ही शरीर की जाँच की जाती है। इसका मक़सद है —
✔️ बीमारी को शुरुआती स्तर पर पकड़ना
✔️ समय पर इलाज शुरू करना
✔️ रोग को फैलने से रोकना
बच्चे और युवा 👦👧: आजकल गलत खानपान और लाइफस्टाइल के कारण कम उम्र में भी कैंसर देखने को मिल रहा है।
मध्यम आयु वर्ग 👨👩: काम का तनाव, धूम्रपान, शराब, प्रदूषण और मोटापा कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं।
बुजुर्ग 👴👵: बढ़ती उम्र के साथ कैंसर का रिस्क और ज्यादा बढ़ जाता है, इसलिए नियमित जांच अनिवार्य है।
स्तन कैंसर (Breast Cancer) – मैमोग्राफी
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervical Cancer) – पैप स्मीयर टेस्ट
फेफड़े का कैंसर (Lung Cancer) – लो-डोज़ CT स्कैन
कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) – कोलोनोस्कोपी
प्रोस्टेट कैंसर (Prostate Cancer) – PSA टेस्ट
मुँह और गले का कैंसर (Oral Cancer) – डेंटल और ENT जांच
✅ शुरुआती चरण में रोग की पहचान
✅ इलाज आसान और कम खर्चीला
✅ जीवन बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है
✅ परिवार और समाज पर बोझ कम होता है
30 वर्ष से ऊपर के लोगों को हर साल एक बार बेसिक स्क्रीनिंग ज़रूर करवानी चाहिए।
जिनके परिवार में कैंसर का इतिहास है, उन्हें डॉक्टर की सलाह से पहले ही जांच शुरू करनी चाहिए।
हर उम्र और लिंग के अनुसार अलग-अलग स्क्रीनिंग की जरूरत होती है।
👉 कैंसर का खतरा हर उम्र में है।
👉 समय रहते स्क्रीनिंग करवाना एक निवेश है – आपके स्वास्थ्य और जीवन के लिए।
👉 याद रखें: “समय पर जांच, कैंसर से बचाव की सबसे बड़ी ढाल है।” 🛡️