आज के समय में मोबाइल फोन हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। 🌐 लेकिन अक्सर यह सवाल उठता है कि “क्या रोज़ाना मोबाइल फोन का इस्तेमाल कैंसर का खतरा बढ़ाता है?” आइए जानते हैं इस विषय पर सच और भ्रांतियों के बीच का फर्क।
मोबाइल फोन रेडियोफ्रीक्वेंसी रेडिएशन (RF Radiation) निकालते हैं। यह नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन है, यानी यह शरीर की DNA संरचना को सीधे नुकसान नहीं पहुँचाता। फिर भी, लंबे समय तक इसके असर को लेकर शोध जारी है।
अब तक की अधिकांश वैज्ञानिक स्टडीज़ ने यह साबित नहीं किया है कि मोबाइल फोन सीधे कैंसर का कारण बनते हैं।
WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) और IARC (International Agency for Research on Cancer) ने RF रेडिएशन को “संभवतः कैंसरकारी” (Possibly Carcinogenic) कैटेगरी में रखा है।
इसका मतलब यह है कि रिस्क पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, लेकिन स्पष्ट सबूत भी मौजूद नहीं हैं।
📞 मोबाइल को कान पर बहुत देर तक लगाकर बात करना
😴 सोते समय सिर के पास मोबाइल रखना
🔋 लगातार नेटवर्क सिग्नल कमजोर जगहों पर फोन का इस्तेमाल
👧 बच्चों द्वारा लंबे समय तक मोबाइल पर गेम या वीडियो देखना
🎧 कॉल करते समय हेडफोन या इयरफोन का इस्तेमाल करें।
📶 नेटवर्क कमजोर जगहों पर लंबे समय तक कॉल न करें।
🌙 सोते समय मोबाइल को सिर से दूर रखें।
⏳ बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर सीमा तय करें।
📱 स्क्रीन टाइम को नियंत्रित रखें।
👉 रोज़ाना मोबाइल फोन इस्तेमाल से कैंसर का खतरा सीधे तौर पर सिद्ध नहीं हुआ है, लेकिन सतर्क रहना समझदारी है।
👉 सुरक्षित आदतें अपनाकर आप मोबाइल के फायदे भी ले सकते हैं और संभावित खतरों से भी बच सकते हैं।
✨ याद रखिए: “टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ज़रूरी है, लेकिन संतुलन और सावधानी और भी ज़रूरी है।”