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नाइट शिफ्ट वर्कर्स में कैंसर रिस्क क्यों बढ़ता है?


🌙 नाइट शिफ्ट वर्कर्स में कैंसर रिस्क क्यों बढ़ता है?



आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में नाइट शिफ्ट करना कई नौकरियों का हिस्सा बन चुका है—चाहे वह आईटी इंडस्ट्री हो, मेडिकल सेक्टर हो, या बीपीओ कंपनियाँ। लेकिन लगातार रात में काम करने की यह आदत आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है। रिसर्च बताती है कि नाइट शिफ्ट वर्कर्स में कुछ तरह के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। आइए जानते हैं क्यों 👉





🌍 शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक और नाइट शिफ्ट



हमारे शरीर में एक सर्केडियन रिद्म (Biological Clock) होती है, जो नींद, जागने और हार्मोन के लेवल को कंट्रोल करती है।

👉 जब आप रात को काम करते हैं और दिन में सोते हैं, तो यह क्लॉक डिस्टर्ब हो जाती है।

👉 इसका असर आपकी इम्यूनिटी, हार्मोन और डीएनए रिपेयर सिस्टम पर पड़ता है।





🧬 नाइट शिफ्ट और कैंसर रिस्क बढ़ने के कारण



1. 🌙 मेलाटोनिन की कमी





2. 🥱 नींद की कमी और तनाव





3. 🍔 असंतुलित खानपान





4. 🚬 धूम्रपान और कैफीन का ज्यादा सेवन







🛡️ बचाव के उपाय



सोने का टाइम फिक्स रखें – दिन में भी अंधेरे और शांत कमरे में 7–8 घंटे की नींद लें।

संतुलित आहार लें – रात में हल्का, हेल्दी खाना खाएँ और जंक फूड से बचें।

नियमित एक्सरसाइज करें – शरीर को एक्टिव रखने से इम्यूनिटी मजबूत होती है।

स्मार्ट ब्रेक्स लें – शिफ्ट के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेकर रिलैक्स करें।

स्मोकिंग और अल्कोहल से बचें – यह आदतें रिस्क को कई गुना बढ़ा देती हैं।

हेल्थ चेकअप कराते रहें – समय-समय पर कैंसर स्क्रीनिंग और मेडिकल चेकअप करवाएँ।





🌟 निष्कर्ष



नाइट शिफ्ट करना कई बार नौकरी की मजबूरी होती है, लेकिन इसके हेल्थ रिस्क को समझना और समय रहते सावधानी बरतना बेहद ज़रूरी है। हेल्दी लाइफस्टाइल और रेगुलर चेकअप के साथ आप अपने शरीर को इन खतरों से काफी हद तक बचा सकते हैं।


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