आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में नाइट शिफ्ट करना कई नौकरियों का हिस्सा बन चुका है—चाहे वह आईटी इंडस्ट्री हो, मेडिकल सेक्टर हो, या बीपीओ कंपनियाँ। लेकिन लगातार रात में काम करने की यह आदत आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है। रिसर्च बताती है कि नाइट शिफ्ट वर्कर्स में कुछ तरह के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। आइए जानते हैं क्यों 👉
हमारे शरीर में एक सर्केडियन रिद्म (Biological Clock) होती है, जो नींद, जागने और हार्मोन के लेवल को कंट्रोल करती है।
👉 जब आप रात को काम करते हैं और दिन में सोते हैं, तो यह क्लॉक डिस्टर्ब हो जाती है।
👉 इसका असर आपकी इम्यूनिटी, हार्मोन और डीएनए रिपेयर सिस्टम पर पड़ता है।
मेलाटोनिन एक हार्मोन है जो नींद लाने के साथ-साथ शरीर को कैंसर सेल्स से बचाने का काम करता है।
नाइट शिफ्ट में रोशनी में काम करने से मेलाटोनिन का उत्पादन घट जाता है।
कम नींद और अनियमित सोने-जागने का पैटर्न शरीर में क्रॉनिक इंफ्लेमेशन बढ़ाता है।
लंबे समय में यह कैंसर सेल्स की ग्रोथ को बढ़ावा दे सकता है।
नाइट शिफ्ट करने वाले लोग अक्सर जंक फूड, कॉफी और स्नैक्स पर ज्यादा निर्भर रहते हैं।
इससे मोटापा और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का खतरा बढ़ता है, जो कैंसर के रिस्क फैक्टर्स हैं।
जागे रहने के लिए लोग ज्यादा कॉफी, चाय या स्मोकिंग करने लगते हैं।
यह आदतें कैंसर रिस्क को और बढ़ा देती हैं।
✅ सोने का टाइम फिक्स रखें – दिन में भी अंधेरे और शांत कमरे में 7–8 घंटे की नींद लें।
✅ संतुलित आहार लें – रात में हल्का, हेल्दी खाना खाएँ और जंक फूड से बचें।
✅ नियमित एक्सरसाइज करें – शरीर को एक्टिव रखने से इम्यूनिटी मजबूत होती है।
✅ स्मार्ट ब्रेक्स लें – शिफ्ट के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेकर रिलैक्स करें।
✅ स्मोकिंग और अल्कोहल से बचें – यह आदतें रिस्क को कई गुना बढ़ा देती हैं।
✅ हेल्थ चेकअप कराते रहें – समय-समय पर कैंसर स्क्रीनिंग और मेडिकल चेकअप करवाएँ।
नाइट शिफ्ट करना कई बार नौकरी की मजबूरी होती है, लेकिन इसके हेल्थ रिस्क को समझना और समय रहते सावधानी बरतना बेहद ज़रूरी है। हेल्दी लाइफस्टाइल और रेगुलर चेकअप के साथ आप अपने शरीर को इन खतरों से काफी हद तक बचा सकते हैं।