कर्क्यूमिन (Curcumin) — हल्दी का सक्रिय यौगिक, जिसमें शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।
कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि और फैलाव को रोकता है।
शरीर में फ्री रेडिकल्स (जो DNA को नुकसान पहुंचाते हैं) को निष्क्रिय करता है।
कीमोथेरेपी की साइड इफेक्ट्स को कम करने में भी मदद कर सकता है।
रोज़ 1 गिलास गर्म हल्दी वाला दूध या
सब्जियों/दाल में एक चुटकी हल्दी ज़रूर डालें।
जिंजरॉल (Gingerol) — अदरक में पाया जाने वाला कंपाउंड, जो सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को घटाता है।
कोलन, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर में कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि को रोकता है।
मतली और उल्टी को कम करता है — खासकर कीमोथेरेपी के दौरान।
शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया को मजबूत करता है।
सुबह गुनगुने पानी में अदरक का रस या टुकड़ा लें।
चाय में अदरक डालें या खाने में कद्दूकस करके मिलाएँ।
एलिसिन (Allicin) — लहसुन का सल्फर यौगिक, जो कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ सक्रिय होता है।
पेट, कोलन और फेफड़े के कैंसर का खतरा घटाता है।
शरीर की डीटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया को बढ़ावा देता है।
DNA की क्षति को रोकने में मदद करता है।
1–2 कली कच्चा या हल्का पकाया हुआ लहसुन रोज़ लें।
इसे सलाद, दाल, या सूप में मिलाएँ।
जब ये तीनों मसाले एक साथ (जैसे हल्दी-अदरक चाय या लहसुन-अदरक पेस्ट) लिए जाते हैं,
तो इनकी एंटी-कैंसर और इम्यून बूस्टिंग क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
❝ हल्दी शरीर को रक्षा देती है, अदरक अंदर से शक्ति देता है, और लहसुन कैंसर की कोशिकाओं से जंग लड़ता है। ❞
नियमित और संतुलित सेवन से ये मसाले कैंसर-रोधी प्राकृतिक कवच बन सकते हैं।