बायोप्सी (Biopsy) टेस्ट एक महत्वपूर्ण चिकित्सीय प्रक्रिया है, जिसका उपयोग शरीर में असामान्य रूप से बढ़ रही कोशिकाओं या टिशूज की जांच के लिए किया जाता है। यह कैंसर की पहचान करने का सबसे सटीक तरीका माना जाता है। जब किसी व्यक्ति में कैंसर के संभावित लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर बायोप्सी टेस्ट की सलाह देते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि बायोप्सी क्या होती है, यह कैसे की जाती है, और कैंसर की जांच में इसकी भूमिका क्या है।
बायोप्सी एक मेडिकल प्रक्रिया है जिसमें शरीर के किसी संदेहास्पद हिस्से (जैसे गांठ, ऊतक या अंग) से एक छोटा सा नमूना (टिशू सैंपल) लिया जाता है और माइक्रोस्कोप के माध्यम से उसकी जांच की जाती है। इस जांच से यह पता चलता है कि कोशिकाएं सामान्य हैं या कैंसरयुक्त (मैलिग्नेंट) हैं।
बायोप्सी केवल कैंसर के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य बीमारियों जैसे इंफेक्शन और ऑटोइम्यून डिजीज की पहचान के लिए भी की जाती है।
जब किसी व्यक्ति में कैंसर के संभावित लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे:
✔️ किसी हिस्से में असामान्य सूजन या गांठ।
✔️ लंबे समय तक ठीक न होने वाला घाव।
✔️ अस्पष्ट रक्तस्राव या संक्रमण।
✔️ एक्स-रे, सीटी स्कैन या एमआरआई में संदिग्ध धब्बे दिखना।
तब डॉक्टर कैंसर की पुष्टि के लिए बायोप्सी टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
कैंसर की जांच के लिए अलग-अलग प्रकार की बायोप्सी की जाती हैं, जो शरीर के प्रभावित हिस्से पर निर्भर करती हैं।
यह सबसे कम इनवेसिव बायोप्सी होती है, जिसमें एक सुई की मदद से टिशू का सैंपल लिया जाता है। यह दो प्रकार की होती है:
🔹 फाइन नीडल एस्पिरेशन (FNA) – बहुत पतली सुई का उपयोग किया जाता है, खासकर लिंफ नोड्स और थायरॉइड में।
🔹 कोर नीडल बायोप्सी (CNB) – मोटी सुई का उपयोग किया जाता है, जिससे अधिक मात्रा में ऊतक प्राप्त किया जा सके।
इस प्रक्रिया में सर्जरी के माध्यम से ऊतक का बड़ा हिस्सा निकाला जाता है।
🔹 इन्सिशनल बायोप्सी – कैंसर के एक छोटे हिस्से को निकाला जाता है।
🔹 एक्सिशनल बायोप्सी – पूरी गांठ या प्रभावित ऊतक को हटाया जाता है।
इसमें एंडोस्कोप (एक लंबी, पतली ट्यूब जिसमें कैमरा और लाइट लगी होती है) की मदद से शरीर के अंदरूनी हिस्सों (जैसे पेट, फेफड़े, आंत) से ऊतक का सैंपल लिया जाता है।
जब नीडल या एंडोस्कोप से टिशू सैंपल लेना संभव नहीं होता, तो सर्जरी की मदद से प्रभावित ऊतक निकाला जाता है।
त्वचा पर असामान्य घाव, मस्सा, या मेलानोमा (त्वचा कैंसर) की जांच के लिए त्वचा की ऊपरी परत का सैंपल लिया जाता है।
बायोप्सी की प्रक्रिया सरल होती है और आमतौर पर कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है।
🔹 स्टेप 1: पहले मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर प्रभावित हिस्से को जांचते हैं।
🔹 स्टेप 2: मरीज को लोकल एनेस्थीसिया (संवेदनाहारी दवा) दी जाती है ताकि दर्द महसूस न हो।
🔹 स्टेप 3: प्रभावित ऊतक (टिशू) का एक छोटा नमूना निकाला जाता है।
🔹 स्टेप 4: सैंपल को माइक्रोस्कोप और अन्य तकनीकों के जरिए जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाता है।
🔹 स्टेप 5: रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टर आगे की उपचार प्रक्रिया तय करते हैं।
✔️ कैंसर की सटीक पुष्टि करता है।
✔️ कैंसर के प्रकार और स्टेज (मंच) का पता चलता है।
✔️ इलाज की सही योजना बनाने में मदद करता है।
✔️ अन्य बीमारियों की भी पहचान हो सकती है।
हालांकि बायोप्सी एक सुरक्षित प्रक्रिया है, लेकिन कुछ मामलों में हल्की जटिलताएँ हो सकती हैं, जैसे:
❌ हल्का दर्द या सूजन।
❌ खून बहना (यदि बड़ी सर्जरी की गई हो)।
❌ संक्रमण (बहुत दुर्लभ मामलों में)।
अगर कोई गंभीर परेशानी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
बायोप्सी की रिपोर्ट आमतौर पर 3 से 7 दिनों में आ जाती है। रिपोर्ट में यह बताया जाता है कि ऊतक सामान्य है, कैंसरग्रस्त है, या उसमें कोई अन्य असामान्य बदलाव हैं।
👉 अगर कैंसर की पुष्टि होती है, तो आगे की स्टेज जांच के लिए MRI, CT स्कैन या PET स्कैन किया जाता है।
👉 अगर कैंसर नहीं पाया जाता, लेकिन लक्षण बने रहते हैं, तो डॉक्टर आगे की जांच कर सकते हैं।
बायोप्सी टेस्ट कैंसर की पहचान करने का सबसे प्रभावी और विश्वसनीय तरीका है। यह टेस्ट डॉक्टरों को कैंसर के प्रकार और स्टेज को समझने में मदद करता है, जिससे सही और समय पर उपचार शुरू किया जा सकता है। अगर किसी भी प्रकार के असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो समय पर डॉक्टर से सलाह लें और आवश्यक जांच करवाएं।