कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की सही पहचान के लिए आधुनिक इमेजिंग तकनीकों का उपयोग किया जाता है। MRI, CT स्कैन और PET स्कैन तीन प्रमुख मेडिकल इमेजिंग टेस्ट हैं, जिनका उपयोग शरीर के आंतरिक अंगों की विस्तृत जांच के लिए किया जाता है। लेकिन कई बार मरीजों के मन में यह सवाल उठता है कि इन तीनों में क्या अंतर है और कौन सा टेस्ट कब जरूरी होता है? इस लेख में हम इन टेस्टों के कार्य, उपयोग और महत्व को विस्तार से समझेंगे।
MRI (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) एक उन्नत इमेजिंग तकनीक है, जिसमें शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) और रेडियो तरंगों (Radio Waves) का उपयोग करके शरीर के अंदरूनी हिस्सों की विस्तृत तस्वीर ली जाती है।
MRI का उपयोग मुख्य रूप से सॉफ्ट टिशू, मांसपेशियों, नसों और दिमाग की बीमारियों की पहचान के लिए किया जाता है। इसे आमतौर पर निम्नलिखित स्थितियों में किया जाता है:
✔️ मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की बीमारियाँ – ब्रेन ट्यूमर, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, स्ट्रोक, और रीढ़ की समस्याएं।
✔️ जोड़ों और मांसपेशियों की समस्याएं – लिगामेंट की चोट, आर्थराइटिस, डिस्क की समस्या।
✔️ हृदय रोगों की जांच – हृदय की संरचना और रक्त प्रवाह की जांच के लिए।
✔️ कैंसर की विस्तृत जांच – ट्यूमर की संरचना और उसके आसपास के ऊतकों की स्थिति जानने के लिए।
✅ रेडिएशन (Radiation) का उपयोग नहीं करता, इसलिए यह सुरक्षित है।
✅ सॉफ्ट टिशू और नसों की स्पष्ट छवि देता है।
✅ मस्तिष्क, हड्डियों और मांसपेशियों की बीमारियों के लिए सबसे प्रभावी तकनीक।
❌ महंगा टेस्ट है।
❌ इसमें अधिक समय (30-60 मिनट) लगता है।
❌ मरीज को संकरे ट्यूब में लेटना पड़ता है, जिससे कुछ लोगों को क्लॉस्ट्रोफोबिया (संकीर्ण स्थान का डर) हो सकता है।
CT स्कैन (कंप्यूटेड टोमोग्राफी) एक इमेजिंग तकनीक है, जिसमें X-ray किरणों और कंप्यूटर की मदद से शरीर के अंदरूनी हिस्सों की 3D तस्वीरें ली जाती हैं। यह तेजी से काम करता है और शरीर के ठोस अंगों की विस्तृत जांच के लिए उपयोगी होता है।
CT स्कैन का उपयोग मुख्य रूप से हड्डियों, फेफड़ों और अंदरूनी अंगों की जांच के लिए किया जाता है। इसे निम्नलिखित स्थितियों में किया जाता है:
✔️ सिर और मस्तिष्क की चोटें – ब्रेन ब्लीड, स्ट्रोक, और सिर पर चोट की स्थिति में।
✔️ फेफड़ों और छाती की समस्याएं – फेफड़ों में संक्रमण, फेफड़ों का कैंसर, टीबी, और निमोनिया।
✔️ अंगों की चोटें और फ्रैक्चर – एक्सीडेंट में आई गंभीर चोटों की जांच के लिए।
✔️ कैंसर की पहचान और स्टेजिंग – ट्यूमर का आकार और उसकी स्थिति जानने के लिए।
✔️ हृदय रोगों की जांच – धमनियों की रुकावट और हृदय की संरचना की जांच के लिए।
✅ यह तेजी से स्कैन करता है (5-10 मिनट में पूरा हो जाता है)।
✅ शरीर के ठोस अंगों (फेफड़े, यकृत, किडनी) की स्पष्ट छवि देता है।
✅ आपातकालीन स्थितियों में तेज और सटीक परिणाम देता है।
❌ इसमें X-ray रेडिएशन का उपयोग होता है, जिससे अत्यधिक स्कैन करवाना नुकसानदायक हो सकता है।
❌ सॉफ्ट टिशू (नसें, मांसपेशियां) को स्पष्ट रूप से नहीं दिखा पाता।
PET स्कैन (पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी) एक विशेष प्रकार का इमेजिंग टेस्ट है, जिसमें रेडियोएक्टिव ट्रेसर इंजेक्ट किया जाता है, जिससे शरीर की कोशिकाओं की गतिविधियों को मापा जाता है। यह कैंसर, न्यूरोलॉजिकल और हृदय रोगों की विस्तृत जांच के लिए किया जाता है।
PET स्कैन उन स्थितियों में किया जाता है, जहां शरीर की चयापचय (Metabolism) गतिविधि को ट्रैक करना जरूरी हो। यह विशेष रूप से कैंसर की जांच और उसके फैलाव (Metastasis) को देखने के लिए किया जाता है।
✔️ कैंसर की स्टेजिंग और मेटास्टेसिस – कैंसर शरीर में कहां-कहां फैला है, इसकी जानकारी।
✔️ हृदय रोगों की जांच – दिल की मांसपेशियों की सक्रियता और रक्त प्रवाह को मापने के लिए।
✔️ मस्तिष्क की बीमारियाँ – अल्जाइमर, डिमेंशिया और पार्किंसंस जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की जांच के लिए।
✅ कैंसर कोशिकाओं की गतिविधि को शुरुआती स्तर पर पहचान सकता है।
✅ कैंसर के इलाज (कीमोथैरेपी, रेडियोथैरेपी) के प्रभाव का आकलन कर सकता है।
✅ न्यूरोलॉजिकल रोगों की गहराई से जांच करता है।
❌ महंगा टेस्ट है।
❌ इसमें हल्की मात्रा में रेडियोधर्मी पदार्थ (Radiotracer) का उपयोग होता है।
❌ कई बार सटीक परिणाम के लिए इसे CT या MRI के साथ करना पड़ता है।
MRI, CT स्कैन और PET स्कैन, तीनों अलग-अलग उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं। डॉक्टर आपकी बीमारी के अनुसार सही इमेजिंग टेस्ट की सलाह देते हैं। यदि कैंसर, हृदय रोग, या न्यूरोलॉजिकल समस्या की संभावना हो, तो उचित समय पर सही स्कैन करवाना जरूरी होता है।
"सही समय पर सही टेस्ट करवाएं और स्वास्थ्य को सुरक्षित रखें!"