टेस्टिकुलर कैंसर यानी अंडकोष का कैंसर, पुरुषों में अपेक्षाकृत कम पाया जाने वाला कैंसर है, लेकिन यह युवाओं (15 से 40 वर्ष की उम्र) में अधिक होता है। यह अंडकोष में शुरू होता है, जो पुरुष प्रजनन प्रणाली का अहम हिस्सा होते हैं और शुक्राणु तथा हार्मोन (जैसे टेस्टोस्टेरोन) बनाते हैं।
समय रहते इसका पता लग जाए तो इसका इलाज बहुत सफल होता है, इसलिए इसके लक्षण और इलाज की जानकारी हर पुरुष के लिए जरूरी है।
शुरुआती चरण में टेस्टिकुलर कैंसर के लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं:
अंडकोष में गांठ या सूजन
एक अंडकोष का आकार बदलना या भारीपन महसूस होना
अंडकोष में दर्द या असहजता
कूल्हे, पेट या पीठ के निचले हिस्से में हल्का दर्द
स्तनों में कोमलता या वृद्धि (हार्मोनल असंतुलन के कारण)
थकान या अचानक वजन घटने जैसे सामान्य लक्षण
अगर ऐसा कुछ महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
शारीरिक जांच – डॉक्टर अंडकोष की स्थिति की जांच करता है।
अल्ट्रासाउंड – अंडकोष में गांठ या असामान्यता को देखने के लिए।
ब्लड टेस्ट – कैंसर मार्कर जैसे AFP, HCG और LDH की जांच की जाती है।
सीटी स्कैन – यह पता लगाने के लिए कि कैंसर शरीर में कहीं और फैला है या नहीं।
इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर किस स्तर पर है:
प्रभावित अंडकोष को शल्य चिकित्सा द्वारा हटा दिया जाता है।
यह पहला और सबसे सामान्य इलाज है।
खासकर सेमिनोमा (एक प्रकार का टेस्टिकुलर कैंसर) में इसका उपयोग होता है।
कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए रेडिएशन दिया जाता है।
कैंसर अगर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल गया हो तो कीमोथेरेपी दी जाती है।
यह दवाओं से कैंसर कोशिकाओं को मारने में मदद करती है।
कुछ मामलों में, खासकर शुरुआती स्टेज में, सर्जरी के बाद नियमित जांच और स्कैन के माध्यम से निगरानी की जाती है।
हां, टेस्टिकुलर कैंसर का इलाज काफी सफल होता है। शुरुआती चरण में इसका इलाज करने से 95% से भी ज्यादा मामलों में मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।
नियमित रूप से स्वयं अंडकोष की जांच करें।
कोई भी असामान्यता महसूस हो तो डॉक्टर से परामर्श लें।
स्वस्थ जीवनशैली और संतुलित आहार अपनाएं।
धूम्रपान और नशे से दूरी बनाएं।
टेस्टिकुलर कैंसर दुर्लभ जरूर है, लेकिन युवाओं में सबसे आम प्रकार के कैंसरों में से एक है। समय रहते जांच और इलाज से यह पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। पुरुषों को अपने शरीर की नियमित जांच करनी चाहिए और कोई भी बदलाव नजर आने पर डॉक्टर से सलाह लेने में हिचक नहीं करनी चाहिए।
सचेत रहें, स्वस्थ रहें!