ओवेरियन कैंसर (Ovarian Cancer) महिलाओं की डिम्बग्रंथि (अंडाशय) में होने वाला कैंसर है। यह महिला प्रजनन प्रणाली का एक गंभीर रोग है, जो अक्सर शुरुआत में बिना लक्षणों के होता है और इसलिए इसका पता देर से चलता है। भारत में महिलाओं में होने वाले कैंसरों में इसका स्थान प्रमुख है।
समय रहते इस बीमारी के लक्षणों और कारणों की पहचान करना बहुत जरूरी है।
आनुवंशिक कारण (Genetic factors)
जिन महिलाओं की मां, बहन या करीबी रिश्तेदार को ओवेरियन या ब्रेस्ट कैंसर हो चुका है, उनमें इसका खतरा ज्यादा होता है।
BRCA1 और BRCA2 जीन में परिवर्तन इसकी आशंका को बढ़ाते हैं।
उम्र
यह कैंसर 50 वर्ष से ऊपर की महिलाओं में अधिक देखा गया है, हालांकि कम उम्र में भी हो सकता है।
प्रजनन का इतिहास
जिन महिलाओं के कोई संतान नहीं हुई है, या बहुत देर से संतान हुई है, उनमें जोखिम अधिक होता है।
हार्मोनल थैरेपी
लंबे समय तक हार्मोन रिप्लेसमेंट थैरेपी (HRT) लेने से खतरा बढ़ सकता है।
मासिक धर्म चक्र
बहुत जल्दी मासिक धर्म शुरू होना या बहुत देर से रजोनिवृत्ति (menopause) होना।
मोटापा और गलत जीवनशैली
असंतुलित खानपान, व्यायाम की कमी, धूम्रपान, और अधिक वजन भी कारण बन सकते हैं।
शुरुआती चरण में ओवेरियन कैंसर के लक्षण साफ तौर पर नजर नहीं आते, लेकिन कुछ आम लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है:
पेट में लगातार सूजन या भारीपन
जल्दी पेट भर जाना या भूख न लगना
पेट या पीठ में लगातार दर्द
बार-बार पेशाब आने की इच्छा
मल त्याग में परेशानी या कब्ज
असामान्य योनि स्राव या अनियमित मासिक धर्म
थकावट, वजन घटना या बढ़ना बिना कारण
अगर ये लक्षण लगातार कुछ हफ्तों तक बने रहें तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
ओवेरियन कैंसर को "साइलेंट किलर" भी कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण देर से सामने आते हैं। लेकिन जागरूकता, नियमित जांच और सही समय पर इलाज से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों को समझना और नज़रअंदाज़ न करना चाहिए।
सावधानी और समय पर कदम, जीवन की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।