ब्लड कैंसर, जिसे ल्यूकेमिया, लिंफोमा और मायलोमा जैसे नामों से जाना जाता है, एक गंभीर लेकिन समय पर पहचान लेने योग्य बीमारी है। यह रक्त, बोन मैरो और लिम्फ सिस्टम को प्रभावित करता है। पुरुषों में इसका खतरा कई बार महिलाओं से अधिक पाया गया है, इसलिए इसके संकेतों को समझना और कारणों को जानना बेहद जरूरी है।
ल्यूकेमिया (Leukemia): यह सफेद रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है।
लिंफोमा (Lymphoma): यह लिंफ सिस्टम को प्रभावित करता है।
मायलोमा (Myeloma): यह प्लाज्मा कोशिकाओं में होता है जो एंटीबॉडी बनाती हैं।
🔴 लगातार थकान और कमजोरी
बिना मेहनत के भी थकावट महसूस होना।
🔴 बार-बार बुखार या संक्रमण
प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे संक्रमण तेजी से होता है।
🔴 वज़न में अचानक गिरावट
बिना किसी प्रयास के वजन तेजी से कम होना।
🔴 शरीर पर बिना वजह नीले या लाल धब्बे
प्लेटलेट्स की कमी के कारण रक्तस्राव होने लगता है।
🔴 हड्डियों या जोड़ो में दर्द
बोन मैरो प्रभावित होने के कारण दर्द बना रहता है।
🔴 सूजे हुए लिम्फ नोड्स (गाँठें)
गले, बगल या कमर के आसपास गांठें महसूस होना।
🔴 सांस लेने में तकलीफ या सीने में दर्द
शरीर में ऑक्सीजन की कमी महसूस होती है।
☣️ जेनेटिक फैक्टर (आनुवंशिकता):
यदि परिवार में किसी को ब्लड कैंसर रहा है, तो जोखिम बढ़ सकता है।
☣️ रेडिएशन और केमिकल्स के संपर्क में आना:
बेंज़ीन जैसे रसायन और कीमोथेरेपी के कुछ ड्रग्स से जोखिम बढ़ता है।
☣️ वायरल संक्रमण:
कुछ वायरस जैसे HIV और HTLV-1 भी ब्लड कैंसर से जुड़े होते हैं।
☣️ स्मोकिंग:
धूम्रपान से ल्यूकेमिया का खतरा बढ़ सकता है।
☣️ प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी:
जिनकी इम्यून सिस्टम कमजोर होती है, उनमें रिस्क ज्यादा होता है।
ब्लड कैंसर के लक्षण अक्सर सामान्य समस्याओं जैसे लग सकते हैं, लेकिन अगर ये लगातार बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। समय रहते पहचान और इलाज से जीवन बचाया जा सकता है। जागरूकता ही बचाव है।
🩺 अपना और अपनों का ध्यान रखें – और लक्षणों को नजरअंदाज न करें।