जब भी हम “कैंसर” शब्द सुनते हैं, तो ज़्यादातर लोगों के मन में बुज़ुर्गों की छवि उभरती है। यह आम धारणा बन गई है कि कैंसर सिर्फ़ बढ़ती उम्र के साथ होता है। लेकिन क्या यह सच है? क्या कैंसर केवल बुजुर्गों को होता है? आइए इस भ्रांति को वैज्ञानिक तथ्यों और आधुनिक चिकित्सा अनुसंधानों के आधार पर समझें।
यह बात सही है कि बुजुर्गों में कैंसर के मामले अधिक पाए जाते हैं। इसके कुछ प्रमुख कारण हैं:
कोशिकीय क्षरण (Cellular Degeneration): उम्र बढ़ने के साथ शरीर की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं और पुनर्जीवित होने की क्षमता कम हो जाती है। इससे कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
जीन में बदलाव: लंबे समय तक शरीर में DNA में छोटे-छोटे बदलाव होते रहते हैं। ये परिवर्तन कैंसर की शुरुआत का कारण बन सकते हैं।
प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी: उम्र के साथ इम्यून सिस्टम कमज़ोर होता है, जिससे शरीर कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में असमर्थ हो सकता है।
बिलकुल नहीं। हाल के वर्षों में युवाओं और यहां तक कि बच्चों में भी कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। इसके कुछ कारण निम्नलिखित हैं:
जीवनशैली संबंधी कारक: धूम्रपान, शराब, जंक फूड, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी युवाओं को कैंसर के जोखिम में डालती है।
जेनेटिक म्यूटेशन (अनुवांशिक परिवर्तन): कुछ कैंसर जैसे ब्रैका जीन म्यूटेशन स्तन और ओवेरियन कैंसर का कारण बनते हैं और ये वंशानुगत हो सकते हैं।
वातावरणीय कारण: प्रदूषण, कीटनाशक, हानिकारक रसायनों के संपर्क से भी युवाओं में कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
वायरल संक्रमण: HPV वायरस से सर्वाइकल कैंसर और हेपेटाइटिस B/C से लिवर कैंसर हो सकता है — ये किसी भी उम्र में हो सकते हैं।
यह सुनकर अचंभा होता है, लेकिन यह सच है कि बच्चों में भी ब्लड कैंसर (ल्यूकेमिया), ब्रेन ट्यूमर, बोन कैंसर जैसे प्रकार पाए जाते हैं। बच्चों में कैंसर के लक्षण अलग हो सकते हैं और जल्दी पहचानना मुश्किल हो सकता है।
चाहे कोई युवा हो या वृद्ध, कैंसर से बचाव और समय पर इलाज संभव है अगर:
नियमित हेल्थ चेकअप कराया जाए
कोई भी असामान्य लक्षण नजरअंदाज़ न किया जाए
जीवनशैली को स्वस्थ रखा जाए
“कैंसर सिर्फ बुजुर्गों को होता है” — यह एक गलतफहमी है। हकीकत यह है कि कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है। जागरूकता, समय पर जांच और सही जीवनशैली ही इससे बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।