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किशोरों में कैंसर: एक अनदेखा खतरा


किशोरों में कैंसर: एक अनदेखा खतरा



जब कैंसर की बात आती है, तो ज़्यादातर लोगों का ध्यान बुजुर्गों और वयस्कों की ओर जाता है। लेकिन एक ऐसा वर्ग है जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है — किशोर, यानी 13 से 19 वर्ष के युवा। किशोरों में कैंसर के मामले दुर्लभ भले ही हों, लेकिन ये गंभीर और जटिल हो सकते हैं। इस आयु वर्ग में न तो बच्चों जैसी प्रतिरक्षा होती है और न ही वयस्कों की तरह मजबूत पहचान प्रणाली। इस कारण कैंसर का निदान और इलाज चुनौतीपूर्ण हो सकता है।





किशोरों में आमतौर पर पाए जाने वाले कैंसर





  1. हॉजकिन्स और नॉन-हॉजकिन्स लिंफोमा

    लिम्फ नोड्स को प्रभावित करने वाला कैंसर जो सूजन और थकान जैसे लक्षणों के साथ आता है।




  2. ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर)

    किशोरों में एक आम प्रकार का कैंसर, जिसमें हड्डी के अंदर बनने वाले रक्त में असामान्य कोशिकाएं पाई जाती हैं।




  3. ऑस्टियोसारकोमा और यूइंग सारकोमा

    हड्डियों और टिशू से जुड़े ये कैंसर किशोरों में दर्द, सूजन और चलने-फिरने में दिक्कत का कारण बन सकते हैं।




  4. ब्रेन ट्यूमर

    सिरदर्द, उल्टी, दृष्टि में बदलाव या व्यवहार में परिवर्तन इसके लक्षण हो सकते हैं।




  5. टेस्टिकुलर और ओवेरियन कैंसर

    किशोरों में हार्मोनल बदलाव के चलते कुछ मामलों में इन अंगों में कैंसर विकसित हो सकता है।







किशोरों में कैंसर के कारण







पहचान में देरी: एक बड़ी चुनौती



किशोरों में कैंसर की पहचान देर से होती है, क्योंकि:







लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें







उपचार के विकल्प



किशोरों में कैंसर का इलाज बच्चों और वयस्कों दोनों से अलग हो सकता है। इसमें शामिल हैं:







कैंसर के साथ जीवन: किशोरों के लिए विशेष ध्यान







निष्कर्ष



किशोरों में कैंसर एक ऐसा खतरा है जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जल्दी पहचान और सही इलाज से न सिर्फ जीवन बचाया जा सकता है, बल्कि किशोरों को एक सामान्य और खुशहाल जीवन जीने का अवसर भी दिया जा सकता है।



हर माता-पिता, शिक्षक और समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वो किशोरों की सेहत को लेकर सजग और जागरूक रहें।


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