जब कैंसर की बात आती है, तो ज़्यादातर लोगों का ध्यान बुजुर्गों और वयस्कों की ओर जाता है। लेकिन एक ऐसा वर्ग है जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है — किशोर, यानी 13 से 19 वर्ष के युवा। किशोरों में कैंसर के मामले दुर्लभ भले ही हों, लेकिन ये गंभीर और जटिल हो सकते हैं। इस आयु वर्ग में न तो बच्चों जैसी प्रतिरक्षा होती है और न ही वयस्कों की तरह मजबूत पहचान प्रणाली। इस कारण कैंसर का निदान और इलाज चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
हॉजकिन्स और नॉन-हॉजकिन्स लिंफोमा
लिम्फ नोड्स को प्रभावित करने वाला कैंसर जो सूजन और थकान जैसे लक्षणों के साथ आता है।
ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर)
किशोरों में एक आम प्रकार का कैंसर, जिसमें हड्डी के अंदर बनने वाले रक्त में असामान्य कोशिकाएं पाई जाती हैं।
ऑस्टियोसारकोमा और यूइंग सारकोमा
हड्डियों और टिशू से जुड़े ये कैंसर किशोरों में दर्द, सूजन और चलने-फिरने में दिक्कत का कारण बन सकते हैं।
ब्रेन ट्यूमर
सिरदर्द, उल्टी, दृष्टि में बदलाव या व्यवहार में परिवर्तन इसके लक्षण हो सकते हैं।
टेस्टिकुलर और ओवेरियन कैंसर
किशोरों में हार्मोनल बदलाव के चलते कुछ मामलों में इन अंगों में कैंसर विकसित हो सकता है।
अनुवांशिक कारक: कुछ कैंसर माता-पिता से जीन के ज़रिए आते हैं।
वातावरणीय एक्सपोजर: रेडिएशन, रसायन, कीटनाशकों से संपर्क।
वायरल संक्रमण: जैसे ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV), एपस्टीन बार वायरस (EBV)।
प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी या पहले से मौजूद कोई बीमारी।
किशोरों में कैंसर की पहचान देर से होती है, क्योंकि:
इस उम्र में थकान, दर्द और भूख न लगना जैसी सामान्य समस्याएं आम हैं और इन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता।
किशोर खुद भी अपने लक्षणों को छिपाते हैं या नजरअंदाज कर देते हैं।
माता-पिता और शिक्षक भी इसे "बढ़ती उम्र के बदलाव" समझकर टाल जाते हैं।
लंबे समय तक बुखार रहना
अत्यधिक थकान
बिना वजह वजन घटना
लसीका ग्रंथियों (lymph nodes) में सूजन
असामान्य गांठ
लगातार सिरदर्द, उल्टी
हड्डियों या जोड़ों में दर्द
किशोरों में कैंसर का इलाज बच्चों और वयस्कों दोनों से अलग हो सकता है। इसमें शामिल हैं:
कीमोथेरेपी
रेडिएशन थेरेपी
सर्जरी
इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी
मनोवैज्ञानिक सहयोग (Counseling) — किशोरों को मानसिक रूप से संभालना बहुत जरूरी होता है।
मनोबल बनाए रखना: कैंसर का इलाज लंबा और मानसिक रूप से थकाऊ होता है। किशोरों को भावनात्मक समर्थन बहुत जरूरी है।
शिक्षा और करियर: इलाज के दौरान स्कूल और पढ़ाई प्रभावित हो सकती है, इसलिए योजना बनाकर चलना जरूरी है।
समाज और दोस्त: सहपाठियों और दोस्तों का सहयोग उन्हें मानसिक रूप से मज़बूत बनाता है।
किशोरों में कैंसर एक ऐसा खतरा है जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जल्दी पहचान और सही इलाज से न सिर्फ जीवन बचाया जा सकता है, बल्कि किशोरों को एक सामान्य और खुशहाल जीवन जीने का अवसर भी दिया जा सकता है।
हर माता-पिता, शिक्षक और समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वो किशोरों की सेहत को लेकर सजग और जागरूक रहें।