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कैंसर की शुरुआती जांच: समय रहते पहचान जरूरी


कैंसर की शुरुआती जांच: समय रहते पहचान जरूरी



कैंसर का नाम सुनते ही डर लगना स्वाभाविक है, लेकिन यह डर तब और बढ़ जाता है जब बीमारी का पता बहुत देर से चलता है। कैंसर की पहचान अगर शुरुआती चरण में हो जाए, तो न सिर्फ इसका इलाज संभव है, बल्कि मरीज की जीवन गुणवत्ता और जीवनकाल दोनों बढ़ सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम समय-समय पर कैंसर की जांच कराते रहें और लक्षणों को नजरअंदाज न करें।





क्यों जरूरी है कैंसर की शुरुआती जांच?







🔍 किन लोगों को नियमित जांच करानी चाहिए?







🩺 कैंसर की कुछ आम जांच और स्क्रीनिंग विधियाँ



1. मैमोग्राफी



स्तन कैंसर की जांच के लिए। 40 वर्ष की उम्र के बाद हर 1-2 साल में जरूरी।



2. पैप स्मीयर टेस्ट और HPV टेस्ट



गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर के लिए महिलाओं को 21 वर्ष की उम्र से करवाना चाहिए।



3. कोलोनोस्कोपी



कोलन और रेक्टल कैंसर की जांच के लिए। 50 वर्ष के बाद नियमित रूप से।



4. PSA टेस्ट



पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की जांच। 50 वर्ष से ऊपर के पुरुषों के लिए आवश्यक।



5. Low-dose CT स्कैन



धूम्रपान करने वालों के लिए फेफड़ों के कैंसर की जांच। विशेष रूप से 55-80 वर्ष की उम्र में।



6. त्वचा की जांच (Skin Examination)



त्वचा कैंसर की पहचान के लिए किसी भी अजीब तिल, मस्से या घाव को नजरअंदाज न करें।



7. ऑरल स्क्रीनिंग



तंबाकू या गुटखा सेवन करने वालों को मुंह और गले की नियमित जांच करानी चाहिए।



8. ब्लड टेस्ट और बायोप्सी



कुछ मामलों में खून की जांच और बायोप्सी शुरुआती कैंसर का पता लगाने में सहायक होती है।





🛑 लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें







🧘‍♂️ रोकथाम के उपाय







📝 निष्कर्ष



कैंसर की शुरुआती पहचान ही सबसे बड़ा हथियार है। समय पर जांच, सही जानकारी और सजगता ही कैंसर के खिलाफ हमारी सबसे बड़ी ताकत है। जितनी जल्दी पता चलेगा, उतनी जल्दी और सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकेगा।



हर व्यक्ति को अपनी और अपने परिवार की सेहत को लेकर सतर्क रहना चाहिए। “समय रहते जांच, जीवन बचाए।”


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