मधुमेह (डायबिटीज़) और कैंसर – ये दोनों गंभीर बीमारियाँ हैं जो आज के समय में तेजी से बढ़ रही हैं। लेकिन क्या इन दोनों के बीच कोई संबंध है? क्या मधुमेह से पीड़ित लोगों में कैंसर का खतरा अधिक होता है?
इस लेख में हम जानेंगे कि डायबिटीज और कैंसर के बीच क्या संबंध है, कैसे शुगर लेवल कैंसर के रिस्क को प्रभावित कर सकता है, और किन उपायों से हम दोनों बीमारियों से बच सकते हैं।
कई वैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि टाइप 2 डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों में कुछ विशेष प्रकार के कैंसर का खतरा थोड़ा बढ़ जाता है। जैसे:
लिवर कैंसर
पैंक्रियास (अग्न्याशय) कैंसर
एंडोमेट्रियल (गर्भाशय की परत) कैंसर
स्तन कैंसर
कोलोरेक्टल (आंतों का) कैंसर
डायबिटीज़ और कैंसर के बीच संबंध पूरी तरह से सीधा नहीं है, लेकिन दोनों में कुछ सामान्य जोखिम कारक होते हैं।
इंसुलिन का उच्च स्तर (Hyperinsulinemia):
डायबिटीज़ में शरीर इंसुलिन को ठीक से उपयोग नहीं करता, जिससे इंसुलिन का स्तर बढ़ सकता है। यह उच्च स्तर कोशिकाओं को असामान्य रूप से बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकता है, जो कैंसर का कारण बन सकता है।
देर से सूजन (Chronic Inflammation):
मधुमेह से शरीर में लंबे समय तक सूजन बनी रह सकती है, जो कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकती है और कैंसर की संभावना बढ़ा सकती है।
मोटापा और निष्क्रिय जीवनशैली:
टाइप 2 डायबिटीज़ का एक मुख्य कारण मोटापा है, और मोटापा कई तरह के कैंसर से भी जुड़ा है।
शुगर का स्तर और कैंसर कोशिकाएं:
कैंसर कोशिकाएं तेज़ी से बढ़ती हैं और अधिक ऊर्जा (ग्लूकोज) की ज़रूरत होती है। उच्च रक्त शर्करा का स्तर कुछ मामलों में कैंसर कोशिकाओं को पोषण देने में मदद कर सकता है।
नहीं।
डायबिटीज़ एक जोखिम कारक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर डायबिटिक व्यक्ति को कैंसर होगा। जीवनशैली, आनुवंशिकी, खानपान और अन्य पर्यावरणीय कारकों की भी इसमें भूमिका होती है।
ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखें
नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करें
दवाएं समय पर लें
डॉक्टर की सलाह का पालन करें
संतुलित आहार लें
ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज
कम वसा, कम चीनी और उच्च फाइबर वाला आहार
नियमित व्यायाम करें
योग, वॉकिंग, साइकलिंग जैसे हल्के व्यायाम रोज करें
धूम्रपान और शराब से बचें
ये दोनों कैंसर और डायबिटीज दोनों के खतरे को बढ़ाते हैं
नियमित स्वास्थ्य जांच
कैंसर स्क्रीनिंग करवाएं
शरीर में किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें
यदि किसी कैंसर मरीज को डायबिटीज़ है, तो इलाज के दौरान ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना और भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि कीमोथेरेपी, स्टेरॉइड और अन्य दवाएं शुगर लेवल को प्रभावित कर सकती हैं।
इसलिए मरीज को एक बहु-विषयक टीम (oncologist + endocrinologist) द्वारा इलाज मिलना चाहिए।
डायबिटीज़ और कैंसर के बीच कुछ वैज्ञानिक संबंध जरूर हैं, लेकिन सावधानी, जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इन बीमारियों से बचा जा सकता है। यदि आप डायबिटिक हैं, तो आपको और अधिक सतर्क रहना चाहिए और समय-समय पर डॉक्टर से सलाह लेते रहना चाहिए।
"स्वस्थ जीवनशैली ही सबसे अच्छा बचाव है – चाहे वो मधुमेह हो या कैंसर।"