आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं अपने परिवार और कार्यस्थल की जिम्मेदारियों में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि वे अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पातीं। खासकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की शुरुआती जांच को अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं। जबकि यह सिद्ध हो चुका है कि यदि कैंसर की पहचान समय रहते हो जाए, तो इसका इलाज सरल और प्रभावी हो सकता है।
इस लेख में हम जानेंगे कि महिलाओं को नियमित कैंसर जांच क्यों करवानी चाहिए, कौन-कौन सी जांच जरूरी हैं, और किस उम्र में कौन से टेस्ट कराना बेहतर होता है।
कैंसर की समय पर पहचान:
शुरुआती अवस्था में कैंसर के लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन स्क्रीनिंग से बीमारी का संकेत मिल सकता है।
इलाज आसान और सफल होता है:
पहले स्टेज में कैंसर का इलाज अधिक सफल और कम खर्चीला होता है।
जीवन की गुणवत्ता में सुधार:
समय पर इलाज से शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से महिला स्वस्थ और सशक्त बनी रहती है।
परिवार की सुरक्षा:
जब महिलाएं स्वस्थ होती हैं, तब वे अपने परिवार की बेहतर देखभाल कर सकती हैं।
1. स्तन कैंसर (Breast Cancer):
जांच:
स्वयं परीक्षण (Self-Examination) – हर महीने
क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जाम – हर साल
मैमोग्राफी – 40 वर्ष की उम्र के बाद हर 1-2 साल में
2. गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervical Cancer):
जांच:
Pap Smear Test – 21 से 65 वर्ष की महिलाओं के लिए हर 3 साल में
HPV टेस्ट – हर 5 साल में एक बार
3. गर्भाशय कैंसर (Endometrial Cancer):
लक्षणों पर नजर रखें:
रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव, अनियमित माहवारी
जांच:
Pelvic ultrasound और एंडोमेट्रियल बायोप्सी (यदि लक्षण हों)
4. ओवेरियन कैंसर (Ovarian Cancer):
कोई विशेष स्क्रीनिंग नहीं, लेकिन पेट फूलना, भूख न लगना, थकावट जैसे लक्षण नजरअंदाज न करें।
5. फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer):
जांच:
यदि महिला धूम्रपान करती है या पूर्व में किया है, तो Low-dose CT scan की सलाह दी जाती है (55 वर्ष से ऊपर)
6. कोलोरेक्टल कैंसर (आंत का कैंसर):
जांच:
कोलोनोस्कोपी – 50 वर्ष के बाद हर 10 साल में
स्टूल टेस्ट – हर साल
उम्र | जरूरी जांच |
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21-30 वर्ष | Pap smear हर 3 साल में |
30-40 वर्ष | Pap + HPV टेस्ट, ब्रेस्ट स्वयं परीक्षण |
40-50 वर्ष | मैमोग्राफी, Pap smear, कोलोरेक्टल जांच |
50+ वर्ष | सभी ऊपर की जांचें + बोन डेंसिटी, ब्लड प्रेशर, शुगर |
यदि आपकी मां, बहन, मौसी या दादी को स्तन या ओवेरियन कैंसर हुआ है, तो आपके लिए BRCA जीन टेस्ट जैसी आनुवांशिक जांच कराना जरूरी हो सकता है।
एचपीवी वैक्सीन: 9–26 वर्ष की लड़कियों के लिए सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए उपयोगी
स्वस्थ जीवनशैली: संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव से दूर रहना
धूम्रपान और शराब से दूरी: ये कई प्रकार के कैंसर का कारण बन सकते हैं
मासिक स्व-परीक्षण: स्तन कैंसर के लिए जरूरी
महिलाओं के लिए नियमित कैंसर जांच न केवल स्वास्थ्य की सुरक्षा है, बल्कि आत्मनिर्भरता और जागरूकता की भी पहचान है। यह सोचकर टालना कि “अभी कोई लक्षण नहीं है” एक बड़ी भूल हो सकती है। समय पर जांच से कैंसर की संभावना को या तो रोका जा सकता है, या उसे प्रारंभिक अवस्था में पकड़ा जा सकता है।
"जांच समय पर कराएं – जीवन को बचाएं।"