गॉलब्लैडर कैंसर (Gallbladder Cancer - GBC) भारत में एक गंभीर और तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है, विशेषकर उत्तर भारत के गंगा के मैदानी इलाकों में। यह कैंसर अक्सर देर से पहचान में आता है, जिससे इलाज की संभावना कम हो जाती है। इस लेख में हम जानेंगे कि गॉलब्लैडर कैंसर के मामलों में वृद्धि क्यों हो रही है और इसके प्रमुख कारण क्या हैं।
भारत में गॉलब्लैडर कैंसर के मामले क्षेत्रीय रूप से भिन्न हैं। उत्तर भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में इसकी घटनाएं सबसे अधिक हैं। एक अध्ययन के अनुसार, 2018 से 2023 के बीच उत्तर भारत में गॉलब्लैडर कैंसर की घटनाएं 15.2 प्रति 100,000 से बढ़कर 18.0 प्रति 100,000 हो गई हैं। इसके विपरीत, दक्षिण भारत में यह दर 3.5 से 4.1 प्रति 100,000 तक सीमित है।
गॉलब्लैडर कैंसर के 80% से अधिक मामलों में पित्ताशय की पथरी पाई जाती है। बड़ी और पुरानी पथरियां पित्ताशय की दीवार को नुकसान पहुंचाकर कैंसर के विकास में सहायक हो सकती हैं।
Salmonella typhi और Helicobacter pylori जैसे बैक्टीरिया के कारण होने वाले पुराने संक्रमण पित्ताशय में सूजन और कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में जल और मिट्टी में भारी धातुओं और कीटनाशकों की उपस्थिति देखी गई है, जो गॉलब्लैडर कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकती है।
बिहार और उत्तर प्रदेश में मिलावटी सरसों के तेल का सेवन गॉलब्लैडर कैंसर के मामलों में वृद्धि का एक संभावित कारण माना जा रहा है।
गॉलब्लैडर कैंसर महिलाओं में पुरुषों की तुलना में तीन से चार गुना अधिक पाया जाता है। इसका कारण हार्मोनल परिवर्तन और पित्ताशय की पथरी की उच्च दर हो सकती है।
मोटापा: मोटे व्यक्तियों में गॉलब्लैडर कैंसर का जोखिम अधिक होता है।
उम्र: यह कैंसर मुख्यतः 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में पाया जाता है।
पारिवारिक इतिहास: गॉलब्लैडर कैंसर या पथरी का पारिवारिक इतिहास जोखिम को बढ़ा सकता है।
स्वच्छ पानी और खाद्य पदार्थों का सेवन: प्रदूषित जल और मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचें।
नियमित स्वास्थ्य जांच: विशेषकर उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को नियमित रूप से पित्ताशय की जांच करानी चाहिए।
स्वस्थ जीवनशैली: संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण से जोखिम को कम किया जा सकता है।
गॉलब्लैडर कैंसर की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय हैं, विशेषकर उत्तर भारत में। इसके प्रमुख कारणों में पित्ताशय की पथरी, पुरानी संक्रमण, प्रदूषित जल और मिलावटी खाद्य पदार्थ शामिल हैं। समय पर जांच और रोकथाम के उपाय अपनाकर इस गंभीर बीमारी के जोखिम को कम किया जा सकता है।