लीवर (यकृत) शरीर का सबसे बड़ा आंतरिक अंग है, जो पाचन, विषाक्त पदार्थों को हटाने, ऊर्जा भंडारण और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करता है।
जब लीवर की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और कैंसर कोशिकाओं में बदल जाती हैं, तो इसे लीवर कैंसर (Liver Cancer) कहा जाता है।
भारत सहित दुनिया भर में हेपेटाइटिस संक्रमण लीवर कैंसर के सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है।
तो सवाल उठता है — हेपेटाइटिस से कैसे बढ़ता है लीवर कैंसर का खतरा?
आइए विस्तार से समझते हैं।
लीवर कैंसर दो मुख्य प्रकार के होते हैं:
प्राथमिक लीवर कैंसर (Primary Liver Cancer)
लीवर से ही शुरू होता है।
सबसे आम प्रकार — हेपेटोसेल्यूलर कार्सिनोमा (Hepatocellular Carcinoma - HCC)।
मेटास्टेटिक लीवर कैंसर (Metastatic Liver Cancer)
शरीर के अन्य हिस्सों से लीवर में फैला हुआ कैंसर।
हेपेटाइटिस लीवर में सूजन (inflammation) की स्थिति है, जो आमतौर पर वायरल संक्रमण के कारण होती है।
हेपेटाइटिस B (HBV) और हेपेटाइटिस C (HCV) लीवर कैंसर के लिए सबसे खतरनाक माने जाते हैं।
यदि हेपेटाइटिस B या C का संक्रमण लंबे समय तक (Chronic) बना रहे, तो लीवर में लगातार सूजन बनी रहती है।
यह सूजन लीवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है और कोशिकीय परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होती है।
चिरकालिक हेपेटाइटिस के कारण लीवर में सिरोसिस विकसित हो सकता है।
सिरोसिस में लीवर ऊतक कठोर और निशानयुक्त (scarred) हो जाता है।
यह प्रक्रिया लीवर कैंसर के विकास के लिए जमीन तैयार करती है।
हेपेटाइटिस B वायरस लीवर की कोशिकाओं के डीएनए में शामिल हो सकता है।
इससे कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, जिससे कैंसर विकसित हो सकता है।
शरीर की इम्यून प्रणाली जब लगातार संक्रमण से लड़ती रहती है, तो यह लीवर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है।
यह भी कैंसर कोशिकाओं के पनपने का एक बड़ा कारण बनता है।
हेपेटाइटिस B या C से संक्रमित लोग
लंबे समय से शराब का सेवन करने वाले
सिरोसिस के मरीज
मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज के रोगी
परिवार में लीवर कैंसर का इतिहास
अफ्लाटॉक्सिन युक्त भोजन का सेवन (फफूंदी लगी अनाज/बीज)
पेट के ऊपर दाहिनी ओर दर्द
पेट में सूजन या भारीपन
अचानक वजन कम होना
भूख में कमी
थकान
पीलिया (त्वचा और आंखों का पीला होना)
मतली और उल्टी
बुखार
ध्यान दें: लीवर कैंसर की शुरुआती अवस्था में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते।
ब्लड टेस्ट – AFP (Alpha-fetoprotein) जांच
अल्ट्रासाउंड
CT स्कैन / MRI
बायोप्सी – कैंसर की पुष्टि के लिए
लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)
सर्जरी
ट्यूमर को हटाना या लीवर ट्रांसप्लांट।
लोकल एब्लेशन थेरेपी
कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए।
रेडिएशन थेरेपी
टारगेटेड थेरेपी
विशेष दवाएं जो कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाकर मारती हैं।
इम्यूनोथेरेपी
हेपेटाइटिस B का टीकाकरण (HBV Vaccine) जरूर कराएं।
हेपेटाइटिस C की स्क्रीनिंग और यदि पॉजिटिव आए तो इलाज कराएं।
साफ-सुथरी सुई, ब्लड ट्रांसफ्यूजन में सावधानी।
शराब का सेवन सीमित करें।
संतुलित आहार लें।
वजन नियंत्रित रखें।
सभी जोखिम कारकों की नियमित जांच कराएं।
हेपेटाइटिस B और C संक्रमण से लीवर कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
सकारात्मक खबर यह है कि HBV के लिए वैक्सीन उपलब्ध है, और HCV के लिए प्रभावी इलाज भी मौजूद है।
यदि आप या आपके परिवार में कोई व्यक्ति जोखिम समूह में आता है, तो नियमित जांच और रोकथाम के उपाय अपनाकर इस खतरनाक कैंसर से बचा जा सकता है।