पेट का कैंसर (Stomach Cancer या Gastric Cancer) दुनिया भर में एक गंभीर बीमारी के रूप में उभर रहा है।
यह तब होता है जब पेट की अंदरूनी परत की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और कैंसर का रूप ले लेती हैं।
भारत में पेट का कैंसर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन समय पर पहचान, सही इलाज और जागरूकता के ज़रिए इसे रोका और ठीक किया जा सकता है।
इस लेख में हम जानेंगे इसके प्रमुख लक्षण (संकेत), कारण, बचाव के उपाय और इलाज के बारे में।
पेट का कैंसर शुरुआत में धीरे-धीरे विकसित होता है, और इसके लक्षण अक्सर अन्य सामान्य बीमारियों जैसे गैस, एसिडिटी या अल्सर जैसे लगते हैं।
भूख में कमी या जल्दी पेट भर जाना
पेट में लगातार दर्द या असहजता
मतली या उल्टी (कभी-कभी खून के साथ)
काला या टार जैसा मल (खून मिलना)
अकारण वजन घटना
पेट में सूजन या भारीपन
थकान या कमजोरी महसूस होना
खून की कमी (एनीमिया)
यदि ये लक्षण लगातार कुछ हफ्तों तक बने रहें, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (H. pylori) संक्रमण
एक प्रकार का बैक्टीरिया जो पेट की परत को नुकसान पहुंचाता है।
गलत खान-पान की आदतें
बहुत ज्यादा नमकीन, मसालेदार, या धुएं में पकी हुई चीज़ें (जैसे स्मोक्ड मीट)।
धूम्रपान और शराब
पेट की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाते हैं।
परिवार में कैंसर का इतिहास
मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता
लंबे समय तक एसिडिटी या गैस्ट्रिक अल्सर
खून की कमी (Pernicious Anemia) और विटामिन B12 की कमी
एंडोस्कोपी (Endoscopy):
पेट में कैमरा डालकर अंदरूनी परत को देखा जाता है।
बायोप्सी:
एंडोस्कोपी के दौरान ऊतक का नमूना लेकर जांच की जाती है।
CT स्कैन या MRI:
कैंसर के फैलाव का पता लगाने के लिए।
PET स्कैन:
शरीर के अन्य हिस्सों में फैलाव की जानकारी के लिए।
ब्लड टेस्ट:
एनीमिया और ट्यूमर मार्कर्स की जांच के लिए।
इलाज इस पर निर्भर करता है कि कैंसर किस स्टेज में है।
सर्जरी (Gastrectomy):
पेट के प्रभावित हिस्से या पूरे पेट को हटाना।
कीमोथेरेपी:
कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए दवाएं।
रेडिएशन थेरेपी:
ट्यूमर को सिकोड़ने के लिए विकिरण का उपयोग।
इम्यूनोथेरेपी:
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैंसर से लड़ने के लिए सक्षम बनाना।
टारगेटेड थेरेपी:
विशेष दवाएं जो केवल कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती हैं।
पेट के कैंसर से बचाव के लिए जीवनशैली और आहार में बदलाव सबसे प्रभावी हैं।
H. pylori संक्रमण का समय रहते इलाज कराएं।
धूम्रपान और शराब से बचें।
संतुलित और ताजे फलों-सब्जियों से भरपूर आहार लें।
ज्यादा नमकीन, मसालेदार और प्रोसेस्ड फूड से बचें।
मोटापा नियंत्रित रखें।
नियमित रूप से डॉक्टर से पेट संबंधी समस्याओं की जांच कराएं।
विटामिन्स और खून की कमी की जांच कराएं।
पेट का कैंसर शुरुआती चरण में पकड़ा जाए तो पूरी तरह ठीक हो सकता है।
इसके लक्षणों को नजरअंदाज न करें और यदि कोई संदेह हो तो समय पर जांच और इलाज कराएं।
स्वस्थ खान-पान, सक्रिय जीवनशैली और सतर्कता ही इस गंभीर बीमारी से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है।