गर्भावस्था एक महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समय होता है। लेकिन यदि इसी समय कैंसर का पता चले, तो स्थिति बहुत जटिल और डरावनी हो सकती है।
हालांकि यह दुर्लभ है, पर गर्भावस्था के दौरान कैंसर संभव है, और इसका सही उपचार और समझदारी से लिया गया निर्णय माँ और शिशु – दोनों की जान बचा सकता है।
इस लेख में जानिए:
गर्भावस्था में कैंसर कैसे पहचाना जाता है,
किन प्रकार के कैंसर आम हैं,
इलाज कैसे किया जाता है,
और क्या सावधानियाँ ज़रूरी हैं।
हर 1,000 में से 1 से 2 महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान कैंसर की संभावना होती है।
यह संख्या भले कम हो, लेकिन सही जानकारी और समय पर कार्रवाई जान बचा सकती है।
स्तन कैंसर (Breast Cancer) – सबसे आम प्रकार।
सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer)
ल्यूकेमिया और लिम्फोमा (ब्लड कैंसर के प्रकार)
थायरॉइड कैंसर
मेलनामा (त्वचा कैंसर का एक प्रकार)
कोलोरेक्टल कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर)
गर्भावस्था के दौरान कई बार कैंसर के लक्षण — जैसे थकान, उल्टी, शरीर में सूजन — प्रेगनेंसी के सामान्य लक्षणों से मिलते-जुलते हैं। इसलिए अक्सर कैंसर देर से पहचाना जाता है।
अल्ट्रासाउंड – सुरक्षित और प्रारंभिक स्तर की जांच।
MRI (बिना कॉन्ट्रास्ट के) – गर्भ में पल रहे शिशु के लिए सुरक्षित।
बायोप्सी – टिशू जांच के लिए जरूरी प्रक्रिया।
ब्लड टेस्ट – कुछ कैंसर मार्कर्स की जांच के लिए।
🚫 ध्यान रखें: X-Ray और CT स्कैन जैसे रेडिएशन आधारित टेस्ट से बचा जाता है, खासकर पहले तिमाही में।
गर्भवती महिला का इलाज उसकी कैंसर की स्टेज, गर्भावस्था की अवस्था (trimester) और कैंसर के प्रकार पर निर्भर करता है।
🔹 सर्जरी:
गर्भावस्था के दौरान कई बार सर्जरी सुरक्षित मानी जाती है, खासकर दूसरी तिमाही में।
🔹 कीमोथेरेपी:
पहले तीन महीनों में नहीं दी जाती (क्योंकि भ्रूण को नुकसान हो सकता है)।
दूसरे और तीसरे तिमाही में कुछ कीमो दवाएं सुरक्षित मानी जाती हैं।
🔹 रेडिएशन थेरेपी:
आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान नहीं दी जाती, क्योंकि यह भ्रूण के लिए हानिकारक हो सकती है।
🔹 टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी:
प्रयोग सीमित हैं, और इनके असर पर अभी शोध जारी है।
बहुत से मामलों में, गर्भावस्था को जारी रखना संभव होता है।
डॉक्टर कैंसर और बच्चे दोनों की स्थिति का आंकलन कर निर्णय लेते हैं।
कुछ मामलों में इलाज शुरू करने के लिए डिलीवरी को थोड़ा पहले कराया जा सकता है (Preterm Delivery)।
🙏 महत्वपूर्ण है कि निर्णय माँ की सेहत, भ्रूण की सुरक्षा और कैंसर की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए लिया जाए — यह निर्णय हमेशा गाइनेकोलॉजिस्ट, ऑन्कोलॉजिस्ट और पीडियाट्रिशन की टीम मिलकर लें।
पहले तीन महीनों में कोई भी कैंसर की दवा भ्रूण को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचा सकती है।
दूसरी और तीसरी तिमाही में कुछ दवाएं सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन फिर भी खतरा बना रहता है।
हर केस में इलाज व्यक्तिगत और विशेषज्ञ सलाह पर निर्भर होना चाहिए।
गर्भवती महिला को कैंसर का पता चलना मानसिक रूप से बहुत भारी होता है।
इसलिए जरूरी है:
परिवार और दोस्तों का भावनात्मक सहारा।
नियमित काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद।
हॉस्पिटल के सपोर्ट ग्रुप्स से जुड़ना।
गर्भावस्था में कैंसर दुर्लभ ज़रूर है, लेकिन असंभव नहीं।
समय पर पहचान, विशेषज्ञ टीम द्वारा इलाज और सही निर्णय के साथ माँ और शिशु — दोनों की जान बचाई जा सकती है।
अगर आपको गर्भावस्था के दौरान कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें या कैंसर की आशंका हो, तो डरें नहीं — जांच कराएं और विशेषज्ञ की राय लें।