गर्भावस्था एक महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत लेकिन संवेदनशील समय होता है। लेकिन जब इसी दौरान कैंसर का पता चले, तो यह अनुभव भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
हालाँकि यह स्थिति दुर्लभ है, लेकिन गर्भवती महिलाओं में भी कैंसर हो सकता है — जैसे स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, थायरॉइड कैंसर या ल्यूकेमिया।
ऐसे मामलों में इलाज और माँ-बच्चे की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी होता है।
स्तन कैंसर (Breast Cancer)
सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer)
थायरॉइड कैंसर (Thyroid Cancer)
ल्यूकेमिया और लिम्फोमा (ब्लड कैंसर)
मेलनामा (त्वचा कैंसर का एक प्रकार)
गर्भावस्था के दौरान शरीर में पहले से ही कई हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं, जिनमें कुछ लक्षण कैंसर जैसे दिख सकते हैं — जैसे थकान, उल्टी, स्तनों में बदलाव।
इसलिए कैंसर की पहचान में देरी हो सकती है। ऐसे में सावधानीपूर्वक जांच और निर्णय की जरूरत होती है।
✔️ MRI (बिना कॉन्ट्रास्ट के)
✔️ अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)
❌ X-ray और CT स्कैन – केवल डॉक्टर की सलाह पर, और तब जब बेहद ज़रूरी हो।
गर्भ की रक्षा के लिए पेट पर शील्डिंग की जाती है।
🔹 पहली तिमाही (0–12 सप्ताह)
भ्रूण का विकास प्रारंभिक स्तर पर होता है — इसलिए कोई भी रेडिएशन या कीमोथेरेपी गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
आमतौर पर इस समय इलाज टाला जाता है, सिवाय जानलेवा कैंसर के।
🔹 दूसरी और तीसरी तिमाही (13–40 सप्ताह)
कुछ प्रकार की कीमोथेरेपी दी जा सकती है।
सर्जरी (जैसे ट्यूमर हटाना) अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती है।
रेडिएशन से अब भी बचना चाहिए।
सर्जरी, विशेष रूप से स्तन कैंसर या थायरॉइड कैंसर में, सुरक्षित रूप से की जा सकती है।
सर्जरी का समय और प्रकार गर्भ की स्थिति और कैंसर की गंभीरता पर निर्भर करता है।
पहले तिमाही में नहीं दी जाती – भ्रूण को नुकसान पहुंच सकता है।
दूसरे और तीसरे तिमाही में कुछ दवाएं सुरक्षित मानी जाती हैं।
डिलीवरी से 3 हफ्ते पहले कीमो नहीं दी जाती ताकि माँ की रिकवरी और बच्चे की सेफ्टी सुनिश्चित हो।
प्रेग्नेंसी के दौरान आमतौर पर नहीं दी जाती।
यदि जीवन रक्षक स्थिति हो, तो शारीरिक सुरक्षा और एक्सपर्ट्स की निगरानी में ही दी जाती है।
डॉक्टर अक्सर डिलीवरी को समय से थोड़ा पहले (preterm) कराने का निर्णय लेते हैं ताकि इलाज शुरू किया जा सके।
भ्रूण की ग्रोथ और स्वास्थ्य पर नियमित निगरानी जरूरी होती है।
यह स्थिति मानसिक रूप से बेहद भारी होती है — डर, चिंता और तनाव आम हैं।
इसलिए परिवार, साथी, डॉक्टर और काउंसलर का सहनुभूति भरा साथ बहुत मदद करता है।
गर्भावस्था के दौरान कैंसर की स्थिति कठिन हो सकती है, लेकिन सही विशेषज्ञ टीम, योजना और धैर्य से माँ और बच्चे — दोनों की रक्षा की जा सकती है।
सावधानी, सतर्कता और समय पर जांच ही सबसे बड़ा बचाव है।
यदि आप या आपके किसी परिचित को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़े — तो घबराएं नहीं, जानकारी लें, विशेषज्ञों से बात करें और एक ठोस योजना बनाएं।