स्तन कैंसर महिलाओं में सबसे आम और तेजी से फैलने वाला कैंसर है। लेकिन एक अच्छी खबर यह है कि अगर यह समय रहते पकड़ में आ जाए, तो इलाज पूरी तरह सफल हो सकता है।
इसलिए ब्रेस्ट कैंसर से बचने का सबसे असरदार तरीका है —
👉 "नियमित मैमोग्राफी जांच"
यह लेख आपको बताएगा कि मैमोग्राफी क्या है, क्यों जरूरी है, कब करवानी चाहिए और इससे ब्रेस्ट कैंसर की पहचान कैसे संभव है।
मैमोग्राफी (Mammography) एक विशेष प्रकार का एक्स-रे होता है, जो स्तनों के अंदर की तस्वीरें लेता है।
यह बहुत ही शुरुआती स्टेज पर भी ब्रेस्ट कैंसर की गांठ या असामान्य कोशिकाओं को पकड़ने में सक्षम है — जब लक्षण न के बराबर होते हैं।
✅ शुरुआती पहचान:
कैंसर का इलाज जितनी जल्दी शुरू हो, सफलता की संभावना उतनी ज्यादा होती है।
✅ गांठ दिखने से पहले ही पता चल सकता है:
कभी-कभी ट्यूमर महसूस नहीं होता, लेकिन मैमोग्राफी उसे दिखा सकती है।
✅ कम रिस्क वाले भी सुरक्षित रहें:
जिन महिलाओं में कोई लक्षण नहीं हैं, उनके लिए यह जांच एक सुरक्षा कवच है।
✅ जीवनरक्षक है:
समय पर हुई मैमोग्राफी से हजारों महिलाओं की जान बचाई जा चुकी है।
उम्र | सिफारिश |
---|---|
40-44 वर्ष | डॉक्टर की सलाह अनुसार, एक बार शुरुआती स्क्रीनिंग |
45-54 वर्ष | हर साल एक बार |
55 वर्ष से ऊपर | हर 1-2 साल में एक बार (स्वास्थ्य और जोखिम अनुसार) |
यदि परिवार में किसी को ब्रेस्ट कैंसर रहा है (फैमिली हिस्ट्री), तो जांच 40 साल से पहले भी शुरू करनी चाहिए — डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है।
कुछ महिलाओं को मामूली असहजता या दबाव महसूस हो सकता है।
यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ 15–20 मिनट की होती है।
अनुभवी टेक्नीशियन इसे सहज और सुरक्षित तरीके से करते हैं।
जिनकी माँ, बहन या नानी को स्तन कैंसर हुआ हो
जिन्हें हार्मोनल थैरेपी दी गई हो
जिनकी उम्र 40+ है
जिनका BRCA1 या BRCA2 जीन पॉजिटिव हो
टेस्ट के दिन पाउडर, डिओड्रेंट या लोशन न लगाएं
ढीले कपड़े पहनें, ताकि आसानी से जांच हो सके
पिछली मैमोग्राफी रिपोर्ट साथ लाएं (यदि हो)
स्तन कैंसर से डरना नहीं, समय पर जांच करवाना जरूरी है।
हर महिला को अपनी सेहत के लिए एक छोटा सा कदम — "नियमित मैमोग्राफी" — ज़रूर उठाना चाहिए।
👉 याद रखें:
"मैमोग्राफी केवल जांच नहीं, एक जीवनरक्षक निर्णय है।"