महिलाओं में मेनोपॉज़ के बाद हार्मोनल बदलाव कई बार असहजता पैदा करते हैं — जैसे गरमाहट (hot flashes), मूड स्विंग्स, अनिद्रा और शुष्कता। ऐसे में डॉक्टर्स अक्सर हार्मोन रिप्लेसमेंट थैरेपी (Hormone Replacement Therapy - HRT) की सलाह देते हैं।
लेकिन एक सवाल अक्सर सामने आता है:
"क्या हार्मोनल थैरेपी लेने से स्तन या अन्य कैंसर का खतरा बढ़ जाता है?"
इस लेख में जानिए हार्मोनल थैरेपी से जुड़े तथ्य, फायदे, जोखिम और कैंसर के साथ इसका संबंध।
हार्मोनल थैरेपी एक चिकित्सा पद्धति है जिसमें शरीर में एस्ट्रोजन (Estrogen) और कभी-कभी प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) जैसे हार्मोन कृत्रिम रूप से दिए जाते हैं।
इसका मुख्य उद्देश्य होता है:
मेनोपॉज़ के लक्षणों से राहत देना
हड्डियों की कमजोरी (Osteoporosis) को रोकना
मूड और जीवन की गुणवत्ता सुधारना
एस्ट्रोजन + प्रोजेस्टेरोन दोनों दिए जाएं
लंबे समय तक (5 साल या उससे अधिक) लेने पर स्तन कैंसर का खतरा बढ़ता है।
रिसर्च बताती है कि यह हर 1,000 महिलाओं में 8–10 अतिरिक्त मामलों का कारण बन सकता है।
पहले से कैंसर का पारिवारिक इतिहास हो
BRCA1/BRCA2 म्यूटेशन वाली महिलाओं को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
बिना डॉक्टर की निगरानी में दवा लेना
खुद से हार्मोन लेना हमेशा जोखिम भरा होता है।
केवल एस्ट्रोजन थैरेपी (जिन महिलाओं की गर्भाशय हटाया गया हो) – इसमें स्तन कैंसर का खतरा कम होता है।
कम समय (3–5 साल) के लिए हार्मोन देना।
50 साल से पहले या रजोनिवृत्ति के प्रारंभिक वर्षों में शुरू करना।
Women’s Health Initiative (WHI) नामक प्रसिद्ध अध्ययन में पाया गया कि संयुक्त HRT (एस्ट्रोजन + प्रोजेस्टिन) स्तन कैंसर, दिल की बीमारी और स्ट्रोक के जोखिम को थोड़ा बढ़ा सकती है।
लेकिन दूसरी तरफ, केवल एस्ट्रोजन थैरेपी से कुछ महिलाओं में जोखिम नहीं बढ़ा।
डॉक्टर से पूरा मेडिकल इतिहास साझा करें
परिवार में कैंसर की हिस्ट्री बताएं
मैमोग्राफी, पैप स्मीयर और ब्लड टेस्ट पहले करा लें
हर 6–12 महीने में चिकित्सकीय जांच
ब्रेस्ट सेल्फ एग्ज़ामिनेशन करें
कोई भी असामान्य लक्षण (जैसे गांठ, डिस्चार्ज) तुरंत रिपोर्ट करें
जिन्हें स्तन कैंसर, ओवेरियन या गर्भाशय कैंसर रहा हो
जिन्हें ब्लड क्लॉटिंग या स्ट्रोक का इतिहास हो
जिनकी मैमोग्राफी में असामान्यता हो
अगर हार्मोनल थैरेपी का खतरा ज्यादा हो तो ये विकल्प मदद कर सकते हैं:
फाइटोएस्ट्रोजेन युक्त डाइट (सोया, अलसी)
योग, ध्यान और नियमित व्यायाम
विटामिन D, कैल्शियम सप्लीमेंट
प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ (डॉक्टर की निगरानी में)
नॉन-हॉर्मोनल दवाएं
🔹 हार्मोनल थैरेपी सभी महिलाओं के लिए नुकसानदायक नहीं होती, लेकिन
🔹 लंबे समय तक उपयोग और बिना डॉक्टर की सलाह के सेवन से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
हर महिला की स्थिति अलग होती है, इसलिए निर्णय भी व्यक्तिगत और सावधानीपूर्वक होना चाहिए।