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पेरिमेनोपॉज़ और कैंसर का संबंध


🌙 पेरिमेनोपॉज़ और कैंसर का संबंध – जानिए जोखिम और सावधानियाँ



पेरिमेनोपॉज़ यानी रजोनिवृत्ति (menopause) से पहले का समय – जब महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाते हैं।

यह अवधि महीनों से लेकर कई वर्षों तक चल सकती है और आमतौर पर 40 से 50 वर्ष की उम्र के बीच होती है।



इस दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, जिससे कई लक्षण होते हैं — जैसे अनियमित पीरियड्स, गरमाहट, मूड स्विंग्स, अनिद्रा आदि।

लेकिन क्या इस बदलाव का कैंसर से भी कोई संबंध है?



आईए जानते हैं पेरिमेनोपॉज़ के दौरान कैंसर का खतरा किस प्रकार से जुड़ा होता है और महिलाएं कैसे सतर्क रह सकती हैं।





🧬 पेरिमेनोपॉज़ के दौरान शरीर में क्या होता है?







⚠️ किस तरह के कैंसर का खतरा बढ़ता है?



🔹 1. स्तन कैंसर (Breast Cancer)





🔹 2. एंडोमेट्रियल कैंसर (गर्भाशय की भीतरी परत का कैंसर)





🔹 3. ओवेरियन कैंसर







🩺 किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?






यदि ये लक्षण 2 हफ्तों से अधिक समय तक बने रहें – तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।






📋 जांचें जो इस समय करवानी चाहिए:
































जांच का नाम क्यों ज़रूरी है
मैमोग्राफी स्तन कैंसर की जांच के लिए
पैप स्मीयर + HPV टेस्ट सर्वाइकल कैंसर की पहचान
पेल्विक अल्ट्रासाउंड गर्भाशय व अंडाशय की स्थिति देखने के लिए
ब्लड टेस्ट (CA-125) ओवेरियन कैंसर के संकेत
थायरॉइड टेस्ट हार्मोनल संतुलन जांचने के लिए


 





🥗 सावधानियाँ और जीवनशैली उपाय:







🧾 निष्कर्ष



पेरिमेनोपॉज़ एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन इस दौरान शरीर में चल रहे बदलावों को समझना और नियमित जांच करवाना बेहद ज़रूरी है।

यदि सही समय पर सतर्क रहें, तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को शुरुआती स्टेज पर ही पहचाना और रोका जा सकता है।




🔔 महिलाएं अपनी ज़िम्मेदारी दूसरों के लिए निभाती हैं, अब अपनी सेहत के लिए भी ज़िम्मेदारी लें।



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