जब भी हम स्तन कैंसर (Breast Cancer) की बात करते हैं, ज़्यादातर लोगों के दिमाग में सिर्फ महिलाएं आती हैं।
लेकिन सच्चाई यह है कि स्तन कैंसर पुरुषों में भी हो सकता है — हालांकि यह दुर्लभ होता है, पर पूरी तरह संभव है।
इस लेख में हम जानेंगे:
पुरुषों में स्तन कैंसर क्यों और कैसे होता है?
इसके लक्षण क्या हैं?
कब जांच करवानी चाहिए?
और इलाज के विकल्प क्या हैं?
पुरुषों के शरीर में भी स्तन ऊतक (Breast Tissue) होता है — हालांकि महिलाओं की तुलना में बहुत कम।
अगर इन ऊतकों में असामान्य सेल्स की वृद्धि हो जाए, तो वह कैंसर का रूप ले सकती है।
हार्मोनल असंतुलन (जैसे एस्ट्रोजन का अधिक बनना)
जेनेटिक म्यूटेशन – खासकर BRCA2 जीन
लीवर की बीमारी – जिससे हार्मोन प्रभावित होते हैं
मोटापा – शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ सकता है
कई सालों तक रेडिएशन एक्सपोजर
छाती (ब्रेस्ट) में गांठ या सूजन
निप्पल से डिस्चार्ज (खून या पारदर्शी तरल)
निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना
छाती की त्वचा में बदलाव (लाली, सिकुड़न, खुजली)
बगल में गांठ या सूजन
❗ यदि ये लक्षण 2 हफ्तों से अधिक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
जोखिम कारक | विवरण |
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पारिवारिक इतिहास | अगर किसी महिला रिश्तेदार को ब्रेस्ट कैंसर रहा हो |
BRCA2 जीन म्यूटेशन | पुरुषों में स्तन कैंसर का बड़ा कारण |
उम्र | 60 साल से अधिक पुरुषों में ज़्यादा मामले |
हार्मोनल थेरेपी | जैसे प्रोस्टेट कैंसर का इलाज |
टेस्टिकल संबंधी बीमारी | अंडकोष का छोटा आकार या सर्जरी का इतिहास |
क्लीनिकल ब्रेस्ट एग्ज़ामिनेशन
मैमोग्राफी या अल्ट्रासाउंड
बायोप्सी – गांठ से ऊतक निकालकर जांच करना
MRI और CT स्कैन – यदि कैंसर फैलने की आशंका हो
पुरुषों में स्तन कैंसर के इलाज के तरीके लगभग महिलाओं जैसे ही होते हैं:
अधिकतर मामलों में मास्टेक्टोमी (पूरे स्तन ऊतक को हटाना) की जाती है।
कैंसर कोशिकाएं फैलने से रोकने के लिए।
शेष कैंसर कोशिकाएं खत्म करने के लिए।
अगर कैंसर एस्ट्रोजन रिसेप्टर पॉजिटिव हो।
संतुलित आहार और व्यायाम से हार्मोन बैलेंस रखें
मोटापा नियंत्रित करें
अल्कोहल और धूम्रपान से बचें
पारिवारिक इतिहास हो तो नियमित मेडिकल चेकअप करवाएं
स्व-निरीक्षण (Self-exam) करें – छाती में कोई गांठ महसूस हो तो रिपोर्ट करें
"स्तन कैंसर सिर्फ महिलाओं की बीमारी नहीं है।"
यह पुरुषों में दुर्लभ जरूर है, लेकिन जानलेवा हो सकता है अगर समय पर पहचान न हो।
🔔 इसलिए, लक्षणों को हल्के में न लें — जांच करवाएं, जागरूक रहें और दूसरों को भी सचेत करें।