स्तन कैंसर (Breast Cancer) महिलाओं में पाया जाने वाला एक प्रमुख कैंसर है, जो स्तन की कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के कारण होता है। यह पुरुषों में भी हो सकता है, लेकिन यह महिलाओं में अधिक सामान्य है। अगर इस बीमारी का समय रहते पता चल जाए, तो इसका सफल इलाज संभव है। इस ब्लॉग में हम स्तन कैंसर के कारण, लक्षण और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
स्तन कैंसर के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ अनुवांशिक और कुछ पर्यावरणीय होते हैं।
यदि परिवार में पहले किसी को स्तन कैंसर हो चुका है, तो अगली पीढ़ी में इसके होने की संभावना अधिक होती है। खासतौर पर BRCA1 और BRCA2 जीन में उत्परिवर्तन स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में असंतुलन स्तन कैंसर का कारण बन सकता है। अत्यधिक हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) लेने से यह जोखिम बढ़ सकता है।
40 वर्ष की आयु के बाद स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
यदि किसी महिला ने पहले रेडिएशन थेरेपी ली हो, तो उसमें स्तन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
स्तन कैंसर के कई लक्षण होते हैं, जो प्रारंभिक अवस्था में हल्के होते हैं लेकिन समय के साथ गंभीर हो सकते हैं।
हालांकि स्तन कैंसर को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, लेकिन कुछ सावधानियों से इसके जोखिम को कम किया जा सकता है।
40 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं को नियमित रूप से मैमोग्राफी (Mammography) और अन्य परीक्षण करवाने चाहिए।
नियमित व्यायाम और योग करने से शरीर स्वस्थ रहता है और कैंसर का खतरा कम होता है।
अत्यधिक शराब और धूम्रपान का सेवन स्तन कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है।
महिलाओं को हर महीने अपने स्तनों की स्वयं जांच करनी चाहिए ताकि किसी भी असामान्यता का जल्द पता चल सके।
तनाव से बचने के लिए मेडिटेशन, योग और पर्याप्त नींद लें।
शोधों के अनुसार, जो महिलाएं अपने बच्चों को स्तनपान कराती हैं, उनमें स्तन कैंसर का खतरा कम होता है।
स्तन कैंसर एक गंभीर लेकिन समय पर पहचाने जाने पर उपचार योग्य बीमारी है। इसके लक्षणों को समझकर और नियमित जांच करवाकर इससे बचाव किया जा सकता है। यदि कोई भी असामान्यता महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। जागरूकता और सही जीवनशैली अपनाकर हम स्तन कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं।