धूम्रपान एक ऐसी आदत है जिसे कई लोग तनाव कम करने या सामाजिक कारणों से अपनाते हैं, लेकिन यह एक धीमा ज़हर है जो पुरुषों में कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों की वजह बनता है।
विशेषकर पुरुषों में, धूम्रपान से जुड़ा कैंसर का खतरा महिलाओं की तुलना में अधिक देखा गया है, क्योंकि धूम्रपान करने वालों की संख्या भी पुरुषों में ज़्यादा है।
इस लेख में जानिए:
धूम्रपान से कौन-कौन से कैंसर हो सकते हैं
पुरुषों में क्यों बढ़ता है यह खतरा
और कैसे छोड़ा जाए यह जानलेवा आदत
धूम्रपान में मौजूद तंबाकू और निकोटीन के अलावा 70 से अधिक रसायन कैंसरकारी (Carcinogenic) होते हैं। ये रसायन शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुँचाते हैं।
कैंसर का प्रकार | कैसे प्रभावित होता है |
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फेफड़ों का कैंसर | सबसे आम और जानलेवा असर |
मुँह और गले का कैंसर | बीड़ी, सिगरेट, गुटखा और तंबाकू सेवन से |
गले की नली (Oesophagus) का कैंसर | लगातार धुएं के संपर्क में रहना |
ब्लैडर कैंसर | तंबाकू के रसायन शरीर से मूत्र के रास्ते निकलते हैं |
किडनी कैंसर | रक्त निस्पंदन में ज़हर का असर |
लिवर कैंसर | निकोटीन और अल्कोहल का संयोजन बेहद घातक |
पेट और आंत का कैंसर | धूम्रपान पाचन प्रक्रिया को बिगाड़ता है |
प्रोस्टेट कैंसर (गंभीर मामलों में) | कुछ रिसर्च में जुड़ाव देखा गया है |
धूम्रपान की उच्च दर – भारत में पुरुषों में धूम्रपान करने वालों की संख्या महिलाओं से कहीं अधिक है।
शराब + सिगरेट का मिश्रण – यह कॉम्बिनेशन कैंसर का खतरा और बढ़ा देता है।
प्रोफेशनल एक्सपोज़र – पुरुष अक्सर फैक्ट्री, केमिकल या कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं, जहाँ धुएं और रसायनों का संपर्क अधिक होता है।
कम स्वास्थ्य जांच – पुरुष नियमित जांच नहीं करवाते, जिससे बीमारी देर से पकड़ में आती है।
माचो सोच – "मुझे कुछ नहीं होगा" वाली सोच से इलाज टलता है।
DNA को नुकसान पहुंचाता है – जिससे कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं।
इम्यून सिस्टम कमजोर होता है – शरीर खुद की मरम्मत नहीं कर पाता।
शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई घटती है – जिससे अंगों पर असर होता है।
सूजन और टॉक्सिन्स बढ़ते हैं – जो कैंसर का कारण बन सकते हैं।
तरीका | मदद कैसे करता है |
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नियंत्रण का फैसला लें | एक तारीख तय करें और घोषणा करें |
निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT) | जैसे पैच, गम, इनहेलर आदि |
परामर्श (Counseling) | मनोवैज्ञानिक सपोर्ट से आदत छोड़ना आसान होता है |
परिवार और दोस्तों का समर्थन लें | अकेले छोड़ना कठिन होता है |
ट्रिगर से बचें | जैसे शराब, तनाव, देर रात का उठना |
एप्स और हेल्पलाइन | Quit Smoking ऐप्स और हेल्पलाइन से जुड़ें |
समय | बदलाव |
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20 मिनट | ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट सामान्य |
12 घंटे | कार्बन मोनोऑक्साइड शरीर से निकलता है |
2 हफ्ते – 3 महीने | ब्लड सर्कुलेशन बेहतर |
1–9 महीने | खांसी, सांस फूलना कम |
1 साल | हार्ट अटैक का खतरा आधा |
5–10 साल | मुंह, गला, ब्लैडर का कैंसर जोखिम घटता है |
10 साल | फेफड़ों का कैंसर खतरा 50% कम |
15 साल | नॉन-स्मोकर जितना जोखिम |
धूम्रपान कोई स्टाइल नहीं, एक धीमा ज़हर है जो पुरुषों में कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।
लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर समय रहते छोड़ दिया जाए, तो शरीर की पुनर्निर्माण क्षमता बहुत शक्तिशाली होती है।
🔔 “आज छोड़ा गया सिगरेट, कल की ज़िंदगी बचा सकता है।”