“जब ज़िंदगी ने चुनौती दी, मैंने मुस्कराकर सामना किया।”
अमित वर्मा, 28 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर, दिल्ली में मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था। ज़िंदगी सामान्य थी – नौकरी, परिवार, दोस्तों के साथ हँसी-खुशी भरा जीवन।
एक दिन उसे अंडकोष में हल्की सूजन और भारीपन महसूस हुआ। शुरुआत में उसने इसे नजरअंदाज किया, लेकिन कुछ दिनों बाद दर्द और असहजता बढ़ गई। तब जाकर उसने डॉक्टर से मिलने का फैसला लिया – जो उसकी ज़िंदगी बदलने वाला था।
डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट करवाए, जिसमें ट्यूमर मार्कर (AFP, HCG) असामान्य पाए गए।
बाद में बायोप्सी और CT स्कैन से पुष्टि हुई कि अमित को टेस्टिकुलर कैंसर है।
“जब मैंने ‘कैंसर’ शब्द सुना, मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई। मुझे अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा डर लगने लगा।” – अमित
सबसे पहले, ट्यूमर को निकालने के लिए एक अंडकोष को हटाना पड़ा।
डॉक्टर ने बताया कि अगर समय पर ट्रीटमेंट हो, तो टेस्टिकुलर कैंसर का इलाज संभव है और रिकवरी रेट बहुत अच्छा होता है।
सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने 3 साइकल की कीमोथेरेपी की सलाह दी।
इसके दौरान अमित को थकान, बाल झड़ना और जी मिचलाना जैसी समस्याओं से जूझना पड़ा।
“कीमोथेरेपी का हर दिन मेरे लिए जंग था, लेकिन मैंने तय किया कि मैं हार नहीं मानूंगा।”
अमित ने बताया कि इस पूरी यात्रा में परिवार और दोस्तों का समर्थन उसकी सबसे बड़ी ताकत बना।
जब वह मानसिक रूप से टूट रहा था, तब परिवार ने उसे भरोसा दिलाया कि वह अकेला नहीं है।
इलाज के साथ-साथ अमित ने अपनी मानसिक स्थिति मजबूत करने के लिए:
ध्यान (Meditation) किया
हल्की योग क्रियाएं शुरू कीं
पोषणयुक्त आहार अपनाया
सोशल मीडिया से ब्रेक लेकर किताबों और प्रकृति से जुड़ाव बढ़ाया
इलाज के 2 साल बाद, अमित अब पूरी तरह स्वस्थ है।
वह नियमित रूप से मेडिकल चेकअप कराता है और अब कैंसर से बचाव और जागरूकता अभियान में भाग लेता है।
“अब मैं हर दिन को एक गिफ्ट मानता हूँ। मैं जी रहा हूँ, खुलकर – और यही मेरी जीत है।”
टेस्टिकुलर कैंसर कम उम्र के पुरुषों में आम है, लेकिन 99% तक इलाज संभव है – अगर समय रहते पकड़ा जाए।
अमित की कहानी हमें सिखाती है कि कैंसर का डर नहीं, समय पर एक्शन लेना ज़रूरी है।
यह एक प्रेरणा है उन सभी के लिए जो कैंसर से लड़ रहे हैं – या डर के कारण जांच नहीं करवा रहे।
टेस्टिकुलर कैंसर कोई जीवन की समाप्ति नहीं है, यह तो एक चुनौती है – जिसे जानकारी, इलाज, और हिम्मत से जीता जा सकता है।
🔔 “शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें – जांच कराएं, जागरूक बनें और दूसरों को भी प्रेरित करें।”
कैंसर हारता है, जब मरीज लड़ता है।