कैंसर को हराना एक बड़ी जीत है। लेकिन कई मरीज़ों, खासकर युवा पुरुषों और महिलाओं, के सामने एक और सवाल खड़ा होता है –
"क्या मैं भविष्य में माँ या पिता बन पाऊँगा?"
फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) पर कैंसर इलाज का असर हो सकता है, लेकिन अच्छी खबर यह है कि आज कई उपाय उपलब्ध हैं जो भविष्य में पैरेंट बनने का सपना जिंदा रख सकते हैं।
कुछ कीमो दवाएं अंडाणु (eggs) या शुक्राणु (sperm) को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
असर इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सी दवा, कितनी मात्रा में और कितने समय तक दी गई है।
पेट, पेल्विस या ब्रेन क्षेत्र में दी गई रेडिएशन थेरेपी प्रजनन अंगों को प्रभावित कर सकती है।
अंडाशय या शुक्राणु कोशिकाएं कमजोर हो सकती हैं।
यदि कैंसर का इलाज प्रजनन अंगों को निकालने के ज़रिए किया गया (जैसे ओवरी, यूटेरस या टेस्टिकल), तो प्राकृतिक गर्भधारण संभव नहीं रहता।
इलाज शुरू करने से पहले फर्टिलिटी को संरक्षित करने के विकल्पों पर विचार करना बहुत ज़रूरी है।
इसमें ऑन्कोलॉजिस्ट और फर्टिलिटी एक्सपर्ट की सलाह लेना मददगार होता है।
Egg Freezing (अंडाणु को संरक्षित करना)
Embryo Freezing (भ्रूण को संरक्षित करना)
Ovarian Tissue Freezing (ओवरी के टिशू को संरक्षित करना)
Ovarian Suppression (दवाओं से ओवरी को अस्थायी रूप से आराम देना)
Sperm Freezing (शुक्राणु संरक्षित करना)
Testicular Tissue Freezing (अंडकोष टिशू संरक्षित करना)
अगर कैंसर के इलाज के बाद फर्टिलिटी पर असर पड़ा हो, तो भी विकल्प हैं:
IVF (In Vitro Fertilization)
डोनर स्पर्म या एग्स का इस्तेमाल
सरोगेसी
दत्तक ग्रहण (Adoption)
⚠️ हर व्यक्ति के लिए अलग विकल्प उपयुक्त हो सकता है – डॉक्टर की सलाह लेना सबसे अहम है।
फर्टिलिटी को लेकर चिंता सिर्फ शारीरिक नहीं, मानसिक भी होती है।
👉 ऐसे में सपोर्ट ग्रुप, काउंसलिंग और अपने साथी व परिवार का सहयोग लेना बेहद जरूरी है।
कैंसर से लड़ाई सिर्फ शरीर की नहीं, जीवन के हर पहलू की होती है – जिसमें फर्टिलिटी भी शामिल है।
सही जानकारी, समय पर सलाह और वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से अब पैरेंट बनने का सपना अधूरा नहीं रह जाता।
🔔 “कैंसर आपको माता-पिता बनने से नहीं रोक सकता – अगर आप समय रहते कदम उठाएं।”